उदयपुर | श्री श्री आनंदमूर्ति जी द्वारा दिनांक 6 सितम्बर 1978 को बिहार के पटना में मानवता के भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए कौशिकी नृत्य का आविष्कार किया गया जो एक सम्पूर्ण व्यायाम भी है ।
इसका असर शरीर की हर कोशिका से आत्मा तक और विशेष तौर से मन के पाँचों कोशों को उन्नत करने में सहायक है ।
दिनांक 6 सितम्बर 2026 को कौशिकी दिवस के अवसर पर आनंद मार्ग प्रचारक संघ, उदयपुर (राजस्थान) के भुक्ति प्रधान डॉ. एस. के वर्मा द्वारा 75 वर्ष की आयु में लगातार एक घंटा कौशिकी नृत्य किया गया ।
उल्लेखनीय है की विगत तीन वर्षों से वे निरंतर हर कौशिकी दिवस पर 1 घंटा कौशिकी नृत्य करते है । अपने दैनिक जीवन में वे दोनों बेला कौशिकी नृत्य और योगासन अभी तक करते आ रहे हैं ।
कौशिकी नृत्य के अभ्यास से होने वाले लाभों में महत्त्वपूर्ण लाभ जैसे शरीर और मन को स्वस्थ रखना और वृद्धावस्था में देरी तथा ऊर्जा के स्तर को बनाये रखना डॉ वर्मा जीवंत उदाहरण है ।
उनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व सभी साधक-साधिकाओं के लिए अनुकरणीय है ।
वे अभी पेसिफिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल्स, उदयपुर में प्रोफेसर एमेरिटस पद पर अपनी सेवायें दे रहे हैं तथा सोसाइटी फॉर माइक्रोवाइटा रिसर्च एंड इंटीग्रेटेड मेडिसिन (स्मरिम), उदयपुर के अध्यक्ष पद को सुशोभित कर रहे हैं ।
