उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के कृषि अनुसंधान केन्द्र, अनुसंधान निदेशालय में क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति, संभाग चतुर्थ-अ (IV-A) की दो दिवसीय बैठक 28 एवं 29 सितंबर, 2026 को निदेशक अनुसंधान की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात अनुसंधान निदेशक डॉ. मनोज कुमार महला ने माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रताप सिंह का स्वागत किया तथा सभी अधिष्ठाताओं, निदेशकों एवं विभागीय अधिकारियों का अभिनंदन किया। उन्होंने फसल अमृत (EF Polymer) के संस्थापक डॉ. नारायण लाल गुर्जर का भी स्वागत किया।
माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रताप सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि क्षेत्रीय अनुसंधान एवं प्रसार सलाहकार समिति बैठक में पिछले वर्ष की उपलब्धियों एवं समस्याओं की समीक्षा के साथ आगामी वर्ष के लिए आवश्यकता-आधारित तकनीकी कार्यक्रम निर्धारित किए जाने चाहिए। कृषक समस्याओं का फीडबैक, प्रभावित क्षेत्र, फोटोग्राफ एवं समाधान की उपलब्धता सहित मजबूत डेटाबेस तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आकस्मिक योजना एवं फसल विविधीकरण किसानों को जोखिम से बचाने और उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुलपति ने पैकेज ऑफ प्रैक्टिस (POP) में पुरानी किस्मों एवं प्रतिबंधित, रसायनों को हटाकर नई अनुशंसाओं को नियमित रूप से अद्यतन करने तथा नई किस्मों के लिए अग्रिम बीज उत्पादन योजना तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही, सभी अनुसंधान परियोजनाओं एवं कौशल-उन्मुख कार्यक्रमों का प्रभाव विश्लेषण तथा अनुसंधान प्रयोगों की नियमित फील्ड मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निदेशक अनुसंधान डॉ. मनोज महला ने बताया कि विश्वविद्यालय के फार्म मशीनरी टेस्टिंग सेंटर के माध्यम से छोटे कृषि उपकरणों एवं कृषि मशीनरी का परीक्षण एवं प्रमाणीकरण किया जा रहा है। परीक्षण में सफल उत्पादों की जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे किसानों एवं संबंधित संस्थाओं को इसकी जानकारी मिल सके। उन्होंने कृषि उत्पादों के क्लस्टर उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन एवं द्वितीयक कृषि को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में नवाचार एवं मूल्य संवर्धन आधारित इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य एवं बाजार उपलब्ध हो सके। उदयपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में जैविक एवं औषधीय फसलों से संबंधित कार्य कर रही इकाइयों द्वारा किसानों को जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऐसी पहल को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
डॉ. महला ने विश्वविद्यालय में प्राप्त नई परियोजनाओं एवं अनुसंधान कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य क्षेत्र के किसानों की समस्याओं का समाधान करना और कृषि विकास को गति देना है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि दो दिवसीय मंथन के माध्यम से संभाग के किसानों के हित में उपयोगी एवं आवश्यकता-आधारित अनुसंधान एवं प्रसार कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
अतिरिक्त निदेशक (कृषि), भीलवाड़ा, डॉ. श्री कैलाश चंद मीणा ने वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की उन्नत कृषि तकनीकों को कृषि प्रसार कार्यकर्ताओं के माध्यम से अधिकाधिक किसानों तक पहुँचाया जाए, ताकि उनकी उत्पादकता एवं आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने रबी फसलों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।
संयुक्त निदेशक कृषि, भीलवाड़ा डॉ. विनोद कुमार जैन ने संभाग चतुर्थ-अ में रबी मौसम के दौरान किसानों के खेतों में आ रही विभिन्न समस्याओं की जानकारी बैठक में साझा की। उन्होंने बताया कि किसानों से प्राप्त फीडबैक एवं खेतों में सामने आ रही समस्याओं को अनुसंधान एवं प्रसार कार्यक्रमों में शामिल किया जाना आवश्यक है। उन्होंने इन समस्याओं के वैज्ञानिक एवं आवश्यकता-आधारित समाधान विकसित कर किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.एस. लखावत ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बैठक को संबोधित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की जानकारी दी तथा कृषि संभाग चतुर्थ-अ की कृषि-जलवायु परिस्थितियों एवं क्षेत्र में विकसित की जा रही नई अनुसंधान तकनीकों पर प्रकाश डाला। डॉ. लखावत ने संभाग की विभिन्न फसलों में किसानों के सामने आ रही समस्याओं के निराकरण हेतु तैयार प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। साथ ही, संभाग चतुर्थ-अ के क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की खेती में आ रही समस्याओं तथा उनके समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में डॉ. आर.एल. सोनी, निदेशक, प्रसार शिक्षा, डॉ. लोकेश गुप्ता, राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर,डॉ. के.के. यादव, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, भीलवाड़ा, डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा, कॉलेज ऑफ डेयरी एवं फूड टेक्नोलॉजी, डॉ. आर.पी. मीणा, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, डूंगरपुर, डॉ. राजश्री उपाध्याय, निदेशक, डीपीएम एवं एचआरडी, डॉ. एल.एन. महावर, कॉलेज ऑफ फिशरीज तथा डॉ. सरला लखावत, अधिष्ठाता, सामुदायिक एवं व्यवहारिक विज्ञान महाविद्यालय, उदयपुर ने कृषकों के हित में अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में डॉ. सुधीर वर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि, उदयपुर. डॉ. विनोद कुमार जैन, संयुक्त निदेशक कृषि, भीलवाड़ा, डॉ. संतोष, संयुक्त निदेशक प्रसार, राजसमंद, कृषि विभाग के अन्य अधिकारीगण तथा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रविकांत शर्मा, सह निदेशक अनुसंधान, अनुसंधान निदेशालय, उदयपुर ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
