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Udaipur News

रानी रोड पर बोटिंग स्टेशन जिला प्रशासन की  वर्ष 2023 की नाव  नीति का उल्लंघन 

जिन विभागों ने  नीति का अनुमोदन किया उन्होंने ही उल्लंघन किया

जिन विभागों ने नीति का अनुमोदन किया उन्होंने ही उल्लंघन किया

मुख्य बिंदु
  • सांसद, विधायकगण, जिला कलेक्टर तथा जनप्रतिनिधियों से छिपाए तथ्य उदयपुर, फतेहसागर रानी रोड छोर से पर्यटक नाव संचालन प्रारंभ कर संबंधित एजेंसियों ने जिला प्रशासन की लिखित नाव नीति सहित विभिन्न न्यायालयी निर्देशों की गंभीर अवेहलना की है।
  • रविवार को हुए झील संवाद में इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया।
  • संवाद में झील संरक्षण समिति से जुड़े डॉ अनिल मेहता में कहा कि उदयपुर की झीलों में नावों से होने वाले प्रदूषण को रोकने तथा देशी प्रवासी पक्षियों के आवास बचाने के उद्देश्य से न्यायालय में विचाराधीन याचिकाओं के संदर्भ में , राज्य सरकार के 25 जुलाई 2022 के निर्देशों की अनुपालना में, जिला प्रशासन ने 11 फरवरी 2023 को नाव नीति प्रारूप राज्य झील विकास प्राधिकरण को भेजा था।
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रानी रोड पर बोटिंग स्टेशन जिला प्रशासन की  वर्ष 2023 की नाव  नीति का उल्लंघन 

सांसद, विधायकगण, जिला कलेक्टर तथा जनप्रतिनिधियों से छिपाए तथ्य उदयपुर, फतेहसागर रानी रोड छोर से पर्यटक नाव संचालन प्रारंभ कर संबंधित एजेंसियों ने जिला प्रशासन की लिखित नाव नीति सहित विभिन्न न्यायालयी निर्देशों की गंभीर अवेहलना की है। रविवार को हुए झील संवाद में इस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया।

संवाद में झील संरक्षण समिति से जुड़े डॉ अनिल मेहता में कहा कि उदयपुर की झीलों में नावों से होने वाले प्रदूषण को रोकने तथा देशी प्रवासी पक्षियों के आवास बचाने के उद्देश्य से न्यायालय में विचाराधीन याचिकाओं के संदर्भ में , राज्य सरकार के 25 जुलाई 2022 के निर्देशों की अनुपालना में, जिला प्रशासन ने 11 फरवरी 2023 को नाव नीति प्रारूप राज्य झील विकास प्राधिकरण को भेजा था।

इस प्रारूप के पैरा छह के अनुसार नाव संचालन के कारण होने वाले प्रदूषण को रोकने एवं पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को सीमित रखने के लिए नावों के संचालन का रूट इस प्रकार निर्धारित किया जाएगा कि वनस्पति और जैविक गतिविधियों में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं हो।

फरवरी 2023 के जिला प्रशासन के पत्र व प्रारूप में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि फतहसागर रानी रोड़ क्षेत्र वनस्पति और जीवों के लिए आरक्षित रखा जायें ताकि उनके प्रवास एवं प्रजनन गतिविधियों में कोई बाधा उत्पन्न नही हो।

इसी प्रकार पिछोला झील में जंगल सफारी के पास के क्षेत्र को वनस्पति और जीवों हेतु आरक्षित रखते हुए इस क्षेत्र में बोटिंग गतिविधियों को निषेध किया जावें।

झील के किनारे लगभग बीस मीटर लम्बी पट्टी , जिसमें पेड़ झाड़ियों, टापू आदि है ,उस क्षेत्र को पक्षियों के हितार्थ व्यक्धान मुक्त रखा जाना चाहिए।

उक्त नो एक्टिविटी क्षेत्र के चिन्हीकरण की जिम्मेदारी वन विभाग एवं मत्स्य विभाग को दी गई।

मेहता ने कहा कि यह दुखद है कि हाल ही रानी रोड पर बनाए गए बोटिंग स्टेशन से सम्बंधित तथ्यों व नियमों को झील से जुड़े विभिन्न सरकारी विभागों ने सांसद, विधायक गण , जनप्रतिनिधियों तथा जिला कलेक्टर से छिपा कर रखा । सर्वाधिक आश्चर्यजनक चुप्पी वन विभाग की है जिसे सुप्रीम कोर्ट तथा एन जी टी के निर्देशों की पालना में सज्जन गढ़ इको सेंसिटिव जोन के रानी रोड हिस्से तथा फतेहसागर वेटलैंड क्षेत्र में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों को रोकना था।

झील प्रेमी तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना , जिसके तहत 125 करोड़ की झील संरक्षण योजना स्वीकृत हुई थी,उसके प्रावधानों के अनुसार भी झीलों के बायो डायवर्सिटी संरक्षण क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। लेकिन, झीलों के पिछले क्षेत्रों में नाव संचालन सहित ऐसी विविध विपरीत गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है। यह उचित नहीं है।

पर्यावरण नंद किशोर शर्मा तथा कुशल रावल ने कहा कि पेयजल की झीलों के आसपास व भीतर होने वाली हर एक व्यावसायिक गतिविधि से पेयजल गुणवत्ता पर दुष्प्रभाव होता है। साथ ही पारिस्थितिक तंत्र को भी हानि होती है। शर्मा तथा रावल ने कहा कि पर्यटन व्यवसायियों के हित के में पेयजल व पारिस्थितिकी का निरंतर अहित किया जा रहा है।

संवाद से पूर्व श्रमदान कर झील सतह पर फैले कचरे को हटाया गया।