विश्व पर्यटन दिवस पर प्रताप गौरव केंद्र और राजस्थान होटलियर क्लब का संयुक्त आयोजन
उदयपुर । प्रताप गौरव केंद्र की स्थापना का उद्देश्य केवल किसी स्मारक या पर्यटन स्थल का निर्माण करना नहीं है, बल्कि राष्ट्र चरित्र निर्माण और युवा पीढ़ी को भारत …
“सनातन” के परिणाम
उदयपुर । प्रताप गौरव केंद्र की स्थापना का उद्देश्य केवल किसी स्मारक या पर्यटन स्थल का निर्माण करना नहीं है, बल्कि राष्ट्र चरित्र निर्माण और युवा पीढ़ी को भारत …
उदयपुर । आर्य समाज हिरण मगरी सेक्टर 4 द्वारा रविवार को नवीन पीढ़ी को संस्कारवान, राष्ट्रभक्त, ईश्वर भक्त और स्वस्थ बनाने के उद्देश्य से सनातन पाठशाला आयोजित की…
उदयपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारतीय संस्कृति और सनातन सभ्यता में हर बार गिरकर वापस खड़े होने की अद्भुत सामर्थ्य…
जयपुर। राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने जलझूलनी एकादशी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि ज…
उदयपुर | नेमिशारण्य में शान्ति के बुनियादी सिद्धांत खोजें गये और पाया कि प्रकृति में शान्ति है और प्रकृति विरोधी आचरण अशांति का कारण है। हमने प्रकृति अस्तित्व …
बाँसवाड़ा गणेशोत्सव के पावन पर्व पर बाँसवाड़ा शहर के किशनपोल स्थित बालमुकुन्द गणेश मण्डल तेली समाज द्वारा इस वर्ष गोवर्धन लीला की अनूठी एवं भव्य झांकी सजाई गई है…
बांसवाड़ा। योग योगेश्वर, युगदृष्टा श्री कृष्ण द्वारा स्थापित प्रकृति पूजा का संदेश वर्तमान में स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिए जरूरी है। श्रीमद्भागवत के दो दृष…
बांसवाड़ा। निवृत्ति सभी कर्मों से विरत होकर कर्म सन्यास का मार्ग है किन्तु प्रवृत्ति सभी कर्मों के फल से विरक्ति भाव रखने का मार्ग है। मतलब कार्य करो मगर तटस्थ…
श्रीगंगानगर। लायंस क्लब श्रीगंगानगर सैंटर द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर जवाहरनगर स्थित अरोड़वंश पब्लिक स्कूल में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाल…
श्रीगंगानगर। श्री अरोड़वंश सनातन धर्म मंदिर (ट्रस्ट) के पूर्व प्रधान स्वर्गीय त्रिलोकचंद वधवा की पुत्रवधू प्रीति गौरव वधवा ने चंडीगढ़ में अपनी अलग पहचान बनाकर …
विंध्याचल, मिर्जापुर (उ.प्र.) - भारतीय गौ सेवा परिषद जो गायों की रक्षा, सेवा और संवर्धन के लिए समर्पित एक प्रमुख संस्था है, ने संगठन विस्तार के क्रम में एक महत…
ऋषि दयानन्द के आगमन से पूर्व विश्व में लोगों को वेदों तथा ईश्वर सहित आत्मा एवं प्रकृति के सत्यस्वरूप का स्पष्ट ज्ञान विदित नहीं था। वेदों, उपनिषद एवं दर्शन आदि…