मेवाड़ की प्रसिद्ध गवरी नृत्य नाटिका का फतहसागर पाल पर मंचन
उदयपुर। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वार्षिक कार्य योजना 2026-27 के तहत स्वीकृत प्लान के अंतर्गत जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, राजस्थान सरकार के त…
“सम्पूर्ण” के परिणाम
उदयपुर। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वार्षिक कार्य योजना 2026-27 के तहत स्वीकृत प्लान के अंतर्गत जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, राजस्थान सरकार के त…
वैदिक धर्म एवं संस्कृति में यज्ञ का प्रमुख स्थान है। यज्ञ किसी भी पवित्र व श्रेष्ठ कार्य करने को कहा जाता है। मनुष्य जो शुभ कर्म करता है वह सब भी यज्ञीय कार्य …
नई दिल्ली । माल लदान के परिवहन को सुगम और तीव्र बनाने के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और भारतीय रेलवे ने आपसी समन्वय को बेहतर बनाकर अधिकतम ट्रेनों को नेटवर्क पर…
भारतीय संस्कृति विश्व की पहली और सम्पूर्ण संसार द्वारा वरण करने योग्य है, आदरणीय वंदनीय संस्कृति है। जो सारे संसार को अपना परिवार कुटुम्ब मानती है। भारतीय धर्म…
उदयपुर | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मजदूरों के मसीहा तथा जिला इंटक के प्रमुख नेता रहे रोशन लाल शर्मा का शनिवार को दुःखद एवं असामयिक निधन हो गया। उनके निधन से …
जैसलमेर । नगर परिषद जैसलमेर एवं नगरा पालिका पोकरण के लिए सोमवार, 14 सितम्बर को प्रातः 8 बजे से एसबीके राजकीय महाविद्यालय जैसलमेर में मतगणना प्रारम्भ होगी। जिला…
उदयपुर | श्री श्री आनंदमूर्ति जी द्वारा दिनांक 6 सितम्बर 1978 को बिहार के पटना में मानवता के भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए कौशिकी नृत्य का आविष्कार…
उदयपुर प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक सरोकारों से ओतप्रोत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला महोत्सव का तीसरा दिन मेवाड़ के लोक अनु…
जयपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।स्पीकर देवनानी …
जयपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।स्पीकर देवनानी …
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन... अर्थात, मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर कभी नहीं। इसलिए फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करें। निष्काम…
ऋषि दयानन्द के आगमन से पूर्व विश्व में लोगों को वेदों तथा ईश्वर सहित आत्मा एवं प्रकृति के सत्यस्वरूप का स्पष्ट ज्ञान विदित नहीं था। वेदों, उपनिषद एवं दर्शन आदि…