उदयपुर। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वार्षिक कार्य योजना 2026-27 के तहत स्वीकृत प्लान के अंतर्गत जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, राजस्थान सरकार के तत्वावधान में माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरआई) द्वारा मेवाड़ अंचल की भील जनजाति की प्रसिद्ध परम्परागत लोकनृत्य नाटिका ‘गवरी’ का मंचन करवाया जा रहा है।
गवरी लोकनृत्य मां पार्वती (गौरज्या) के प्रति अटूट श्रद्धा का पर्व है। मान्यता है कि मां पार्वती (गौरज्या) सवा महीने के लिए अपने मायके मेवाड़ आती हैं।
भील समाज उन्हें बेटी मानकर विभिन्न खेलों एवं प्रसंगों के माध्यम से उनका सत्कार एवं मनोरंजन करता है।गवरी नाटिका का मुख्य कथानक भगवान शिव एवं भस्मासुर की पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें राया (शिवजी) और बुड़िया (भस्मासुर) मुख्य पात्र होते हैं।
मां गौरज्या के प्रति आदिवासी समाज की आस्था का प्रमाण यह है कि गवरी नृत्य अनुष्ठान के दौरान कलाकार 40 दिन तक घर नहीं जाते, नंगे पांव चलते हैं, जमीन पर सोते हैं तथा दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
इस दौरान हरी सब्जी, प्याज, लहसुन, मांस एवं मदिरा पूरी तरह वर्जित रहते हैं। गवरी का रोचक तथ्य यह है कि इसमें महिला पात्रों का अभिनय भी पुरुष कलाकारों द्वारा किया जाता है।
गड़ावण (प्रतिमा स्थापना) से वलावण (विसर्जन) तक की कुल अवधि 40 दिवस रहती है।फतहसागर पाल पर गवरी दल ने किया मंचनटीआरआई द्वारा सितम्बर 2026 में उदयपुर के सहेलियों की बाड़ी, फतहसागर पाल, भारतीय लोककला मंडल एवं शिल्पग्राम में गवरी मंचन करवाया जा रहा है।
इसी क्रम में 18 सितम्बर को फतहसागर पाल, उदयपुर पर बड़गांव ब्लॉक के ब्राह्मणों का बरड़ा गांव के जनजाति गवरी दल को मंचन के लिए आमंत्रित किया गया।
जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की आयुक्त सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी एवं टीआरआई निदेशक ओम प्रकाश जैन ने विधिवत पूजा कर गवरी का शुभारम्भ किया।
उन्होंने गवरी दल के मुख्य पात्र शिव के प्रतीक बुड़िया, मां पार्वती के प्रतीक राई, गवरी के मुख्य संचालक कुटकुडिया, भोपाजी एवं अन्य गवरी दल सदस्यों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।गवरी मंचन में दल के लगभग 40 से 50 सदस्यों द्वारा सम्पूर्ण दिवस गवरी की विभिन्न घाई एवं लघु नाटिकाओं का प्रदर्शन किया गया।
इस धार्मिक एवं पारम्परिक नृत्य नाटिका का उपस्थित पर्यटकों एवं शहरवासियों ने श्रद्धा भाव से आनंद लिया।
इस अवसर पर गवरी नृत्य नाटिका की सम्पूर्ण गाथा श्री भगवान लाल जी कच्छावा द्वारा बताई गई।कार्यक्रम में टीआरआई से निदेशक (सांख्यिकी) जिनेन्द्र जैन, व्याख्याता हर्षवदन सिंह सोलंकी,, तनेराज सिंह सोढा तथा रमेश असोड़ा, सांस्कृतिक सलाहकार उपस्थित रहे।इन स्थानों पर भी होगा गवरी मंचनटीआरआई निदेशक ओपी जैन ने बताया कि 24-25 सितम्बर 2026 को भारतीय लोककला मंडल तथा 29-30 सितम्बर 2026 को शिल्पग्राम में गवरी मंचन का कार्यक्रम आयोजित होगा।
इसके अलावा 24 सितम्बर 2026 को कुम्भलगढ़, राजसमंद में भी गवरी नृत्य नाटिका का मंचन किया जाएगा।
