सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छ्रया: संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्:- ब्रह्मचारी आचार्य द्विज राज प्रभु
बांसवाड़ा। यहां कौन स्थाई है ? काल अपने ग्रास के लिए सबके पीछे लगा रहता है। महाभारत काल की सभी प्रगति को देखकर भी विदुर संतुष्ट नहीं थे। धृतराष्ट्र से बोले समस…











