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Kota News

1100 साल पुराने मठ के सनसनीखेज महंत देवानंद हत्याकांड का खुलासे में मदद करने वाली जाबाज पुलिस टीम

के डी अब्बासी 

के डी अब्बासी

मुख्य बिंदु
  • कोटा शहर पुलिस ने बहुचर्चित और सनसनीखेज महंत देवानंद हत्याकांड का खुलासा करने में मदद करने वाली पुलिस की जाबाज टीम।
  • करीब 1100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक मठ से जुड़े इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था।
  • लगातार जांच, तकनीकी विश्लेषण, सूचना संकलन और टीमवर्क के दम पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया।
  • इस महत्वपूर्ण कार्रवाई का नेतृत्व एसआईटी ने किया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद्र मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला, वृत्ताधिकारी रुद्रप्रकाश शर्मा, वृत्ताधिकारी मनीष शर्मा, वृत्ताधिकारी योगेश शर्मा, थानाधिकारी अनिल कुमार टेलर, रामस्वरुप, मांगेलाल यादव, रामलक्ष्मण, मुकेश कुमार, देवेश भारद्वाज, सतीश कुमार, महेन्द्र मारु एवं ज्योति मौर्य ने अहम भूमिका निभाई।
  • तकनीकी जांच और आरोपियों की पहचान में साइबर सेल ने विशेष योगदान दिया।
  • टीम में हेड कांस्टेबल इन्द्र सिंह, सुरेश कुमार, अशोक सिंह, लक्ष्मण सिंह तथा सुनील चंदेल शामिल रहे।
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1100 साल पुराने मठ के सनसनीखेज महंत देवानंद हत्याकांड का खुलासे में मदद करने वाली जाबाज पुलिस टीम

कोटा,जून। कोटा शहर पुलिस ने बहुचर्चित और सनसनीखेज महंत देवानंद हत्याकांड का खुलासा करने में मदद करने वाली पुलिस की जाबाज टीम।

 करीब 1100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक मठ से जुड़े इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। लगातार जांच, तकनीकी विश्लेषण, सूचना संकलन और टीमवर्क के दम पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया।

इस महत्वपूर्ण कार्रवाई का नेतृत्व एसआईटी ने किया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद्र मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला, वृत्ताधिकारी रुद्रप्रकाश शर्मा, वृत्ताधिकारी मनीष शर्मा, वृत्ताधिकारी योगेश शर्मा, थानाधिकारी अनिल कुमार टेलर, रामस्वरुप, मांगेलाल यादव, रामलक्ष्मण, मुकेश कुमार, देवेश भारद्वाज, सतीश कुमार, महेन्द्र मारु एवं ज्योति मौर्य ने अहम भूमिका निभाई।

तकनीकी जांच और आरोपियों की पहचान में साइबर सेल ने विशेष योगदान दिया। टीम में हेड कांस्टेबल इन्द्र सिंह, सुरेश कुमार, अशोक सिंह, लक्ष्मण सिंह तथा सुनील चंदेल शामिल रहे। इनमें विशेष रूप से लक्ष्मण सिंह कानि 1380 और सुनील चंदेल कानि 1979 की अभियुक्तों की पहचान और ट्रेसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मैदानी स्तर पर कार्रवाई को सफल बनाने में डीएसटी टीम के रामवीर सिंह, सुरेन्द्र सिंह, बहादुर सिंह, कृष्णगोपाल, रोहिताश, छत्रसाल, प्रदीप, शौकत, परमेश्वर एवं जयवीर ने सक्रिय योगदान दिया।

वहीं सीसीटीवी टीम के सुरेश और अजीत (रेलवे कॉलोनी) ने तकनीकी साक्ष्य जुटाने में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।

इसके अलावा अन्य सहयोगी टीम में प्रताप सिंह (एजीटीएफ), शिवराज, लतीफ मोहम्मद, जगदीश, धर्मवीर, अरशद, जयदीप, हनुमान, राधेश्याम, जयपाल, मनीष, विद्धानंद यादव, भंवरसिंह एवं अटल ने लगातार मेहनत और समन्वय के साथ जांच को अंजाम तक पहुंचाया।

इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया कि तकनीक, रणनीति और टीमवर्क के दम पर पुलिस किसी भी जटिल मामले की गुत्थी सुलझाने में सक्षम है।