अब तक पर्यटन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को तैयार करना रहा है जो पर्यटकों को अच्छी सेवाएं दे सकें। समय आ गया है कि हम यह भी सिखाएं कि लोग खुद एक अच्छे और जिम्मेदार पर्यटक यात्री कैसे बनें।
पर्यटन की बात होते ही हमारे सामने होटल, एयरलाइंस, ट्रैवल एजेंसियां, टूर गाइड, रेस्टोरेंट और लाखों रोजगार की तस्वीर आती है। यह स्वाभाविक भी है।
पर्यटन एक बड़ा उद्योग है और इसमें प्रशिक्षित लोगों की जरूरत होती है। लेकिन इसका एक दूसरा पक्ष भी है, जिस पर हमने कम ध्यान दिया है—टूरिस्ट और ट्रैवलर खुद।
अब तक टूरिज्म एजुकेशन को मुख्यतः ‘सप्लाई साइड’ से देखा गया है। यानी लोगों को यह सिखाया जाता है कि टूरिस्ट को अच्छी सर्विस कैसे दी जाए और उससे बिजनेस कैसे किया जाए। लेकिन टूरिज्म केवल उद्योग या व्यवसाय नहीं है। टूरिज्म एक जीवन शैली भी है।
आज लगभग हर व्यक्ति यात्रा करता है। कोई हॉलिडे के लिए, कोई पढ़ाई या काम के लिए, कोई तीर्थयात्रा पर और कोई स्पोर्ट्स या एडवेंचर के लिए। हम ट्रिप के लिए पैसे बचाते हैं, समय निकालते हैं और प्लानिंग करते हैं।
तो फिर सवाल है—क्या हमें अच्छा ट्रैवल करना भी नहीं सीखना चाहिए? एक अच्छा ट्रैवलर केवल वह नहीं है जो किसी डेस्टिनेशन तक पहुंच जाए। वह जानता है कि कैसे प्लान करना है, क्या देखना है, क्या एक्सपीरियंस करना है और कैसे व्यवहार करना है।
आज टेक्नोलॉजी ने ट्रैवल को आसान भी बनाया है और जटिल भी। स्मार्टफोन से हम फ्लाइट और होटल बुक कर सकते हैं, मैप देख सकते हैं, भाषा का ट्रांसलेशन कर सकते हैं और किसी जगह का इतिहास जान सकते हैं। लेकिन इसी दुनिया में फेक रिव्यू, भ्रामक फोटो, ऑनलाइन फ्रॉड, हिडन चार्ज और जरूरत से ज्यादा जानकारी भी है।
इसलिए आज के ट्रैवलर को कुछ नई स्किल्स चाहिए। युवाओं को सीखना चाहिए कि ट्रैवल की स्मार्ट प्लानिंग कैसे करें, सही और गलत जानकारी में अंतर कैसे करें, टेक्नोलॉजी का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करें, सही बुकिंग करें और अपना बजट संभालें। डेस्टिनेशन पर पहुंचकर केवल प्रसिद्ध जगहों की फोटो खींचना ही काफी नहीं है। वहां के लोगों, संस्कृति और जीवन को समझना भी यात्रा का हिस्सा होना चाहिए।
एक और महत्वपूर्ण स्किल है—अपने ट्रैवल एक्सपीरियंस को कैप्चर और शेयर करना। थोड़ी फोटोग्राफी, वीडियो मेकिंग, राइटिंग और सोशल मीडिया की समझ एक सामान्य ट्रिप को भी यादगार बना सकती है। ट्रैवल का सबसे बड़ा फायदा न फोटो है, न सोशल मीडिया पोस्ट से।
ट्रैवल हमें बेहतर इंसान बना सकता है। यात्रा हमें अपने परिचित माहौल से बाहर निकालती है।
हम अलग भाषा बोलने वाले, अलग खाना खाने वाले और अलग तरह से सोचने वाले लोगों से मिलते हैं। हमें समझ आता है कि जीवन जीने के कई तरीके हैं।
ट्रेन लेट होने पर धैर्य, किसी धार्मिक स्थान पर सम्मान, दूसरी संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी—ये सब ट्रैवल हमें सिखा सकता है।
इसलिए ट्रैवल को बिना दीवारों वाली क्लासरूम कहा जा सकता है।
युवाओं में ट्रैवल को लेकर बढ़ती रुचि एक बड़ा अवसर है। स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में टूरिज्म केवल उन विद्यार्थियों के लिए नहीं होना चाहिए जो होटल, एयरलाइन या ट्रैवल कंपनी में करियर बनाना चाहते हैं। हर विद्यार्थी को अच्छा ट्रैवलर बनने का अवसर मिलना चाहिए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत टूरिज्म को हर स्ट्रीम के विद्यार्थियों के लिए एक रोचक वैल्यू-एडिंग और स्किल-एन्हांसमेंट कोर्स बनाया जा सकता है। इसका उद्देश्य सभी को टूरिज्म प्रोफेशनल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर ट्रैवलर और अंततः बेहतर इंसान बनाना होना चाहिए।
विश्व टूरिज्म दिवस पर हमें केवल यह नहीं पूछना चाहिए—“हम टूरिज्म में ज्यादा रोजगार कैसे पैदा करें?” हमें यह सवाल भी पूछना चाहिए— “हम बेहतर ट्रैवलर कैसे तैयार करें?”
क्योंकि अच्छी यात्रा वह है जिसमें हम केवल नई जगहें और फोटो लेकर नहीं लौटते, बल्कि नए अनुभव, नई समझ और जीवन की कुछ नई सीख भी साथ लेकर लौटते हैं।
