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डाॅ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने किया ‘वोटरी’ का शुभारम्भ

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर, उदयपुर -मेवाड पूर्व राजपरिवार के सदस्य डाॅ.
  • लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विजया दशमी के पावन अवसर पर उदयपुर के जगदीश मार्ग स्थित ‘वोटरी’ का विधिवत् शुभारंभ किया।
  • ‘वोटरी’ पारंपरिक हथकरघों, प्राचीन शिल्पकला और जीवंत रीति-रिवाजों को सम्मान देने वाला एक ऐसा मंच है, जहाँ प्राचीन कलाओं को पुनर्जीवित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य के साथ ही कारीगरों की कारीगरी और उनकी आजीविका को ध्यान में रख इसका आरम्भ किया गया है।
  • वोटरी के कलेक्शन पर संस्थपिका श्रीमती निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने बताया कि यह भारत के पटना -बलांगीर और मेवाड़, पूरब और पश्चिम की जीवंत संस्कृतियों को मिलाकर एक ऐसा संगम तैयार किया गया है, जहाँ समरसता के साथ दोनों कलाएं खिलेंगी भी और महकेंगी भी।
  • भारत की सदियों पुरानी परम्पराओं और रीति-रिवाज में बुनकरों, शिल्पियों और कारीगरों की भिन्न-भिन्न भूमिकाएं रही हैं।
  • जिनमें कई प्राचीन गाथाओं और परम्पराओं का विशेष सम्बन्ध भी रहा है।
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डाॅ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने किया ‘वोटरी’ का शुभारम्भ

उदयपुर, उदयपुर -मेवाड पूर्व राजपरिवार के सदस्य डाॅ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विजया दशमी के पावन अवसर पर उदयपुर के जगदीश मार्ग स्थित ‘वोटरी’ का विधिवत् शुभारंभ किया।

‘वोटरी’ पारंपरिक हथकरघों, प्राचीन शिल्पकला और जीवंत रीति-रिवाजों को सम्मान देने वाला एक ऐसा मंच है, जहाँ प्राचीन कलाओं को पुनर्जीवित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य के साथ ही कारीगरों की कारीगरी और उनकी आजीविका को ध्यान में रख इसका आरम्भ किया गया है। 

वोटरी के कलेक्शन पर संस्थपिका श्रीमती निवृत्ति कुमारी मेवाड़ ने बताया कि यह भारत के पटना -बलांगीर और मेवाड़, पूरब और पश्चिम की जीवंत संस्कृतियों को मिलाकर एक ऐसा संगम तैयार किया गया है, जहाँ समरसता के साथ दोनों कलाएं खिलेंगी भी और महकेंगी भी।

भारत की सदियों पुरानी परम्पराओं और रीति-रिवाज में बुनकरों, शिल्पियों और कारीगरों की भिन्न-भिन्न भूमिकाएं रही हैं। जिनमें कई प्राचीन गाथाओं और परम्पराओं का विशेष सम्बन्ध भी रहा है। प्राचीन कला-धरोहरों और संकृति से रूबरू करवाने और उन्हें जीवंत और समृद्ध बनाए रखा जाने में वोटरी का यह मंच एक प्रयास और संकल्प है।