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कंटेंपररी कलाकार सभी सीमाओं के परे सोचते हैं और यह बेहद खूबसूरत है’ - ‘अप नेक्स्ट’ आर्ट शो में महिमा चौधरी

वर्ली स्थित नेहरू सेंटर एसी आर्ट गैलरी में रंगों, बनावट और कंटेंपररी ऊर्जा का खूबसूरत संगम देखने को मिला, जब ‘अप नेक्स्ट'- अ न्यू वेव ऑफ

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कंटेंपररी कलाकार सभी सीमाओं के परे सोचते हैं और यह बेहद खूबसूरत है’ - ‘अप नेक्स्ट’ आर्ट शो में महिमा चौधरी

वर्ली स्थित नेहरू सेंटर एसी आर्ट गैलरी में रंगों, बनावट और कंटेंपररी ऊर्जा का खूबसूरत संगम देखने को मिला, जबअप नेक्स्ट'- न्यू वेव ऑफ कंटेंपररी आर्टप्रदर्शनी का उद्घाटन अभिनेत्री महिमा चौधरी, ‘हनुमान अंशफेम संगीतकार धीरेंद्र मुलकलवार, जाने-माने परोपकारी डॉ. अनील काशी मुरारका, वरिष्ठ कलाकार किरण चोपड़ा, टैला आर्ट गैलरी की क्यूरेटर्स रितु चोपड़ा और विकास सिंह तथा प्रदर्शनी में भाग ले रहे कलाकारों की मौजूदगी में हुआ।

भारत और विदेशों के कलाकारों की कृतियों से सजी इस प्रदर्शनी में जीवंत एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग्स से लेकर विशाल इंस्टॉलेशंस तक देखने को मिले, जिसने पूरी शाम को एक बेहद खूबसूरत अनुभव में बदल दिया। इस मौके को आध्यात्मिक स्पर्श देते हुए धीरेंद्र मुलकलवार नेहनुमान अंशके लिए अपनी रचनासियावर रामचंद्र की जयप्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने पूरी गैलरी को आध्यात्मिक अनुगूंज से भर दिया और प्रदर्शनी की शुरुआत को बेहद शुभ बना दिया।

महिमा चौधरी ने प्रदर्शनी में मौजूद हर कलाकार के साथ पर्याप्त समय बिताया और उनकी कृतियों को समझने के साथ-साथ उनकी सराहना भी की। उन्होंने कहा, “मुझे हर तरह की कला पसंद है, लेकिन कंटेंपररी कला वाकई बहुत शानदार है! अब कोई सख्त सीमाएं नहीं रह गई हैं... आज के कलाकार आध्यात्मिकता और धर्म से लेकर अपने आसपास की दुनिया में हो रही घटनाओं तक, हर चीज़ को अपनी कला के माध्यम से व्यक्त कर रहे हैं और वह भी पूरी बेबाकी से, अपने तरीके से। अब कलाकारों ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं और यह देखना बेहद खूबसूरत है कि इस तरह की प्रदर्शनियों के माध्यम से उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है।

डॉ. अनील काशी मुरारका और धीरेंद्र मुलकलवार ने भी प्रदर्शित कृतियों की विविधता और गहराई की सराहना की।

टैला आर्ट गैलरी की रितु चोपड़ा और विकास सिंह द्वारा क्यूरेट की गईअप नेक्स्टप्रदर्शनी में 16 ऐसे कलाकारों को एक साथ लाया गया है, जो कला के अलग-अलग माध्यमों की पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर यह सवाल उठा रहे हैं कि आज समकालीन कला की नई भाषा क्या है। इस प्रदर्शनी में 20 के दशक के मध्य में अपने करियर की शुरुआत कर रहे कलाकारों से लेकर 50 के दशक में सक्रिय अनुभवी कलाकारों तक शामिल हैं। इनमें मीना यादव, रिता छावछरिया, पूजा शर्मा, राखी शाह, तिथी आरेकर, भावना मधानी, निधि चरण, अमिता गोस्वामी, कल्पेश चव्हाण, रचना कारिया, श्वेता भदानी मोदी, कैलास काळे, चीना मदान, राखी बैद, ओल्गा विकोनिना, और कंचन महांते शामिल हैं।

प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षणों में 108 अलग-अलग कैनवस से बनी एक मॉड्यूलर कलाकृति है। हर कैनवस अपने आप में एक पूर्ण कृति है, जिसे गेरुए, टेराकोटा, गहरे हरे और मिट्टी जैसे भूरे रंगों में तैयार किया गया है। ये सभी कैनवस मिलकर मंदिर जैसी तीन उभरती हुई आकृतियां बनाते हैं। संख्या 108 के आध्यात्मिक महत्व से प्रेरित यह कृति चित्रकला को दोहराव, ध्यान और अनुष्ठान की एक प्रक्रिया में बदल देती है। प्रदर्शनी का एक अन्य प्रमुख आकर्षण फाइबर, बुनाई, पुराने/मिले हुए कपड़ों और सिलाई बुनाई जैसे बेहद मेहनत वाले हस्तशिल्प से तैयार किया गया एक विशाल टेक्सटाइल इंस्टॉलेशन है। यह कृति पारंपरिक रूप से घरेलू कामकाज से जुड़े माध्यम को एक भव्य कंटेम्पररी संरचना में बदल देती है और श्रम, स्मृति, स्थिरता तथा लैंगिक भूमिकाओं जैसे विषयों पर संवाद की संभावनाएं खोलती है।

अप नेक्स्ट - न्यू वेव ऑफ कंटेंपररी आर्टप्रदर्शनी 28 सितंबर 2026 तक मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर एसी आर्ट गैलरी में प्रदर्शित की जा रही है। प्रदर्शनी प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शकों के लिए खुली है।