उदयपुर। जैन सोशल ग्रुप उदयपुर विजय, जैन सोशल ग्रुप संगिनी विजय तथा आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के न्यू ऑडिटोरियम में 'भक्तामर हीलिंग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन' कार्यक्रम भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भक्तामर हीलर डॉ. मंजू जैन के सान्निध्य ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
1500 से अधिक लोगों से खचाखच भरा सभागार कार्यक्रम को लेकर शहरवासियों में गजब का उत्साह देखने को मिला। सभागार 1500 से अधिक लोगों से पूरी तरह खचाखच भर गया और पूरा माहौल बेहद शांत, अनुशासित व आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
संस्थापक अध्यक्ष अनिल नाहर ने स्वागत उद्बोधन देते हुए बताया कि यह अपने आप में अनूठा और पहली बार आयोजित होने वाला कार्यक्रम था, नाहर ने भक्तामर स्तोत्र की महिमा के बारे में बताया। अनिल नाहर ने बताया कि इस अनूठे आयोजन का मुख्य उद्देश्य भक्तामर स्तोत्र के माध्यम से शहरवासियों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का संचार करना था, जो पूरी तरह सफल रहा।
आयोजन में विधायक ताराचंद जैन, महापौर पारस सिंघवी, आरएनटी मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. राहुल जैन, ओपी चपलोत एवं रजनी डांगी ने बतौर अतिथि शिरकत की।
डॉ. मंजू जैन का अनूठा हीलिंग सेशन और चमत्कारिक अनुभव अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. मंजू जैन ने अपने संबोधन और हीलिंग सेशन के दौरान भक्तामर स्तोत्र के चमत्कारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जिन लोगों ने भक्तामर हीलिंग का सहारा लिया, वे सुरक्षित रहे। उन्होंने समझाया कि यह कोई झाड़-फूंक नहीं, बल्कि ड्रग लैस थेरेपी है, जो पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाए तो जो पढ़ेगा उसको फर्क पड़ेगा ही पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि 48 गाथाओं वाले भक्तामर स्तोत्र और बिना नमक के भोजन का जीवन में खासा महत्व है। एक-एक श्लोक को लेकर उसके प्रयोग बताए गए, जैसे 8वां श्लोक पुत्र-पुत्री प्राप्ति के लिए तथा गंभीर असाध्य रोगों में कारगर है।
भक्तामर के प्रभाव से पेड़-पौधों, कैंसर पीड़ित मरीजों और अन्य समस्याओं में भी फर्क पड़ता है।
उन्होंने विशेष प्रयोग साझा करते हुए बताया कि यदि कोई व्यक्ति गुम हो जाए, किसी का अपहरण हो जाए या कोई लड़की घर से भाग जाए या चला जाए, तो 7वें से 48वें श्लोक तक का पाठ सुबह, दोपहर और शाम को 3-3 बार लगातार 3 दिन तक करना चाहिए।
इसके माध्यम से मात्र 21 दिनों में आवाज में सुधार और 48 साल की उम्र में संतान प्राप्ति जैसे चमत्कारी अनुभव भी साझा किए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि इसके प्रभाव से खारे पानी को मीठा करने और बोरिंग के पानी में सुधार जैसे प्रयोग भी संभव हैं, साथ ही यह घुटनों के दर्द, वीजा, नौकरी, प्रॉपर्टी, माइग्रेन जैसी समस्याओं में भी अत्यंत कारगर है।
अग्नि शमन और व्यापारिक सफलता के विशेष श्लोक डॉ. जैन ने बताया कि व्यापार से जुड़े लोगों के लिए 36वां श्लोक अचूक मंत्र है, जो स्टील, गोल्ड, मेटल व अन्य व्यापारियों के कारोबार में विशेष लाभप्रद साबित होता है।
वहीं, अग्नि शमन (आग से बचाव) के लिए 40वें श्लोक का विशेष महत्व बताया गया है।
उन्होंने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि जैन मुनि महाराज की दिनचर्या इतनी कठिन तपस्या से गुजरती है कि उनके मुख से निकले शब्द और साधना स्वतः ही श्लोक व मंत्र बन जाते हैं, जिनका प्रभाव जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है।
पदाधिकारियों ने साझा किए विचार अध्यक्ष पिंकी मंडावत ने बताया कि डॉ. मंजू जैन के सत्र से सभी साधकों को आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक बल प्राप्त हुआ है। संगिनी संस्थापक अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक मधु खमेसरा ने बताया कि कार्यक्रम में आये सभी श्रावकों को नवकार मंत्र की चांदी की तस्वीर तथा अन्य कई प्रकार की प्रभावनाएं भेंट की गईं, साथ ही लक्की ड्रॉ के माध्यम से 11 विशेष पुरस्कार भी दिए गए।
सवाल-जवाब सेशन में गंभीर बीमारियों का मिला समाधान कार्यक्रम के अंत में एक विशेष सवाल-जवाब सत्र आयोजित किया गया, जिसमें डायलिसिस, लकवा और अन्य गंभीर असाध्य रोगों से ग्रसित लोगों ने अपनी समस्याओं पर मार्गदर्शन लिया। डॉ. मंजू जैन ने सभी श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें विशेष मंत्र और हीलिंग के सटीक तरीके बताए।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में राजेश खमेसरा, गुणवंत बागरेचा, गोपाल बम्ब, गगन तलेसरा, टीनू मंडावत, हिम्मत सिसोदिया, प्रियंका तलेसरा एवं कई अन्य सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में आभार कार्यक्रम संयोजक विजय सिसोदिया ने व्यक्त किया।
