विज्ञान समिति के प्रबुद्ध चिंतन प्रकोष्ठ की मासिक बैठक में विशेषज्ञ वार्ता के अन्तर्गत ‘‘जलवायु परिवर्तन एवं मानव जीवन पर प्रभाव’’ विषय पर बोलते हुए डॉ. आर.के. गर्ग ने बताया कि पेरिस समझौते के अन्तर्गत विश्व के सभी देशों को अपने कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन को इस प्रकार कम करना है कि वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े, किन्तु वर्तमान परिदृश्य में तापमान के 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश ने अपनी ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बढ़ाते हुए न्यूनतम उत्सर्जन की नीति अपनाई है, जिसके फलस्वरूप विश्व की 18 प्रतिशत जनसंख्या होने के बावजूद भारत का वैश्विक उत्सर्जन स्तर केवल 7 प्रतिशत के आस-पास है।
डॉ. गर्ग ने चेतावनी दी कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अनेक देश प्रभावित हुए हैं तथा खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है, अतः हमारी योजना इस प्रकार होनी चाहिए कि सभी नागरिक जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. के.एल. तोतावत ने की। डॉ. के.एल. कोठारी ने विषय विशेष पर कृषि संबंधी जानकारी प्रस्तुत की। प्रबुद्ध चिंतन प्रकोष्ठ के संयोजक मुनीश गोयल ने प्रत्येक नागरिक से अपने पर्यावरणीय कर्तव्यों का पालन करने का आह्वान किया।
प्रकृति प्रेमी जैव रसायन विशेषज्ञ एवं मीडिया प्रभारी प्रो. डॉ. विमल शर्मा ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चुनौती है।
बढ़ते तापमान से हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, हृदय एवं श्वसन संबंधी रोगों का खतरा बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण और बढ़ती गर्मी के कारण विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों तथा पहले से बीमार व्यक्तियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
जलवायु परिवर्तन से मच्छरजनित रोगों के प्रसार, जल एवं खाद्य सुरक्षा तथा पोषण पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पर्यावरण ही स्वस्थ मानव जीवन का आधार है।
वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, जैविक एवं टिकाऊ कृषि तथा व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से हम जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में योगदान दे सकते हैं।
वार्ता में डॉ. महीप भटनागर, डॉ. के.पी. तलेसरा, डॉ. बी.एल. चावत, इंजी. एस.सी.के. वेद, इंजी. आर.के. नेभनानी, इंजी. अशोक जैन, शांतिलाल भंडारी, गणपत पोरवाल आदि प्रबुद्धजन उपस्थित रह परिचर्चा में सक्रिय योगदान दिया।
