मुख्य सामग्री पर जाएँ
शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 उदयपुर · 29°C
Education News

इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप एवं सस्टेनेबिलिटी – खाद्य एवं डेयरी उद्योग का अगला दशक विषयक दोदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन उद्योग जगत के दिग्गजों ने साझा किए सफलता के अनुभव

फूड एंड डेयरी’ क्षेत्र में अपार संभावनाएँ - कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह

मुख्य बिंदु
  • अनुसंधान, नवाचार और गुणवत्ता वैश्विक सफलता का मंत्र- श्री विनय दीक्षितउदयपुर, कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी (CDFT), उदयपुर एवं CDFT एलुमनाई एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 24 अक्टूबर, 2026 को “इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप एवं सस्टेनेबिलिटी – खाद्य एवं डेयरी उद्योग का अगला दशक” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित महाराणा प्रताप सभागार, उदयपुर में हुआ।
  • इस सेमिनार का मूल सूत्र “Reconnect • Rejuvenate • Reimagine” है, जिसका उद्देश्य पूर्व विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर जोड़कर खाद्य एवं डेयरी क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी विकास, उद्यमिता तथा सतत विकास की नई संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना है।
  • इस अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में देश-विदेश के 500 से अधिक वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं औद्योगिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
WAf𝕏TGin✉🖨
इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप एवं सस्टेनेबिलिटी – खाद्य एवं डेयरी उद्योग का अगला दशक विषयक दोदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन उद्योग जगत के दिग्गजों ने साझा किए सफलता के अनुभव
1 / 4


अनुसंधान, नवाचार और गुणवत्ता वैश्विक सफलता का मंत्र- श्री विनय दीक्षित


उदयपुर,  कॉलेज ऑफ डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी (CDFT), उदयपुर एवं CDFT एलुमनाई एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 24 अक्टूबर, 2026 को “इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप एवं सस्टेनेबिलिटी – खाद्य एवं डेयरी उद्योग का अगला दशक” विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर स्थित महाराणा प्रताप सभागार, उदयपुर में हुआ। इस सेमिनार का मूल सूत्र “Reconnect • Rejuvenate • Reimagine” है, जिसका उद्देश्य पूर्व विद्यार्थियों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर जोड़कर खाद्य एवं डेयरी क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी विकास, उद्यमिता तथा सतत विकास की नई संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना है।  इस अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में देश-विदेश के 500 से अधिक वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं औद्योगिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन संबोधन में हल्दीराम के प्रतिनिधि श्री विनय दीक्षित ने कंपनी की व्यावसायिक यात्रा एवं 90 देशों तक उसके वैश्विक विस्तार के सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हल्दीराम ने अपने कारोबार की शुरुआत किस प्रकार की और अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से उत्पादों में नवाचार को बढ़ावा दिया। उन्होंने बताया कि बेसन के स्थान पर मोठ की दाल का उपयोग कर नमकीन तैयार करना एक महत्वपूर्ण नवाचार साबित हुआ। उत्पादों में निरंतर नवाचार, गुणवत्ता और बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप बदलावों ने हल्दीराम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान स्थापित करने तथा विदेशों तक कारोबार का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तिरुपति ग्रुप के श्री अशोक गोयल ने अपने मुख्य वक्तव्य में समूह की व्यावसायिक यात्रा साझा करते हुए बताया कि  इसकी शुरुआत छोटे स्तर से हुई थी, लेकिन निरंतर प्रयासों, अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार के बल पर समूह ने फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। उन्होंने बताया कि अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए समूह ने बाजार में प्रोटीन-आधारित नए उत्पाद प्रस्तुत किए, जिससे कारोबार के विस्तार को नई दिशा मिली। श्री गोयल ने उद्यमिता के अपने अनुभव साझा करते हुए नवाचार, गुणवत्ता एवं अनुसंधान को उद्योग की प्रगति का आधार बताया तथा भविष्य में उभरते व्यावसायिक अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एमपीयूएटी के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में खाद्य एवं डेयरी उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों एवं कौशल विकास के माध्यम से रोजगार, स्वरोजगार और स्टार्टअप के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया तथा खाद्य एवं डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

पोंटिका ग्रुप की श्रीमती अलका गोयल ने अपनी उद्यमशीलता की प्रेरणादायक यात्रा साझा करते हुए बताया कि स्नातक की पढ़ाई के बाद कुछ समय के अंतराल के पश्चात उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की। निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने अपने कारोबार को सफलता के एक बड़े मुकाम तक पहुँचाया। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि संकल्प, मेहनत और सही अवसरों का उपयोग कर उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की जा सकती है।

कार्यक्रम के दौरान डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीन अनुसंधान, नवाचार, आधुनिक तकनीकों तथा सतत विकास से संबंधित विषयों पर वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों द्वारा लिखित स्मारिका का विमोचन किया गया। स्मारिका में खाद्य एवं डेयरी उद्योग की नवीनतम प्रगति, शोध उपलब्धियों तथा भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

सेमिनार के आयोजन में विभिन्न संस्थानों एवं औद्योगिक समूहों का सहयोग

अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन में खाद्य एवं डेयरी उद्योग से जुड़े विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं औद्योगिक समूहों ने सहयोग प्रदान किया। आयोजन के टाइटल पार्टनर हल्दीराम, प्लेटिनम पार्टनर तिरुपति ग्रुप और गोल्ड पार्टनर अमूल/जीसीएमएमएफ हैं। इनके साथ केपी मनीष (लंच पार्टनर), फ्लेवर एन फ्यूजन इंग्रीडिएंट्स प्रा. लि. (डिनर पार्टनर), फ्यूचर ऑटोमेशन प्रा. लि. (किट पार्टनर), श्योर रियल एस्टेट, दुबई (कल्चरल प्रोग्राम पार्टनर), श्री कामधेनु इलेक्ट्रॉनिक्स प्रा. लि. (ब्रेकफास्ट पार्टनर), भारत मिल्क प्रोडक्ट्स प्रा. लि. – बाबा मिल्क (रजिस्ट्रेशन पार्टनर) और हॉको (आइसक्रीम पार्टनर) भी सहयोगी हैं। एएसए फूड्स प्रा. लि., विश्वा मशीनरी एंड प्रोसेसिंग प्रा. लि. तथा डेल्मोस रिसर्च ब्रॉन्ज पार्टनर हैं। इसके अलावा श्री गंगानगर जिला दुग्ध उत्पादक संघ एवं उरमूल – बीकानेर (आरसीडीएफ) ने वित्तीय सहयोग दिया है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता एवं निदेशकों सहित डॉ. लोकेश गुप्ता, अधिष्ठाता, राजस्थान कृषि महाविद्यालय; डॉ. मनोज कुमार महला, निदेशक अनुसंधान; डॉ. एल. एन. महावर, अधिष्ठाता, मत्स्यकी महाविद्यालय तथा डॉ. प्रकाश पंवार, निदेशक, DRI उपस्थित रहे। इनके साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एलुमनाई एसोसिएशन के सदस्य, उद्यमी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा प्रेस एवं मीडिया के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम के आरंभ में एलुमनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. करुण चांडालिया ने स्वागत उद्बोधन दिया। अधिष्ठाता डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा ने सम्मेलन के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न तकनीकी सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। श्री निर्भय गोयल (सचिव) ने संपूर्ण कार्यक्रम के प्रबंधन एवं समन्वय की जिम्मेदारी निभाई। डॉ. कमलेश कुमार मीना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री भूमि बैती एवं श्री कुशल ने किया।