मुख्य सामग्री पर जाएँ
सोमवार, 28 सितंबर 2026 उदयपुर · 29°C
Udaipur News

संस्कृत सम्मेलन में गूंजा देववाणी का गौरव, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

महंत श्री महेंद्रानंद गिरि महाराज के पावन सानिध्य में हुआ भव्य आयोजन, संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन का लिया संकल्प।

WAf𝕏TGin✉🖨
संस्कृत सम्मेलन में गूंजा देववाणी का गौरव, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

उदयपुर। संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति, संस्कारों और ज्ञान परंपरा की आधारशिला है।

संस्कृत के अध्ययन से न केवल ज्ञान और बौद्धिक विकास होता है, बल्कि जीवन में संस्कार, संतोष और नैतिक मूल्यों का भी संचार होता है।

इसी भावना के साथ संस्कृत भारती, उदयपुर द्वारा आयोजित भव्य संस्कृत सम्मेलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह में संस्कृत के प्रचार-प्रसार, संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया गया।

समारोह में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा संस्कृत के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पावन सानिध्य प्रदान कर रहे श्री श्री 1008 महंत श्री महेंद्रानंद गिरि जी महाराज, मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के राजस्थान क्षेत्र संगठन मंत्री श्री कमल शर्मा, मुख्य अतिथि सांसद सीपी जोशी, उदयपुर की जिला पुलिस अधीक्षक डॉ.अमृता दुहन, समारोह अध्यक्ष मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा तथा विशिष्ट अतिथि संस्कृत विभागाध्यक्ष एवं पीजी कला संकाय के डीन प्रो. नीरज शर्मा सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

संस्कृत शिक्षा अधिकारी डॉ. भगवती शंकर व्यास ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत कर समारोह को मंगलमय बनाया। इसके पश्चात रेखा सिसोदिया ने ध्येय मंत्र का पाठ किया।

संस्कृत सभी भाषाओं की जननी, संस्कारों की संवाहक : महंत श्री महेंद्रानंद गिरि अपने आशीर्वचन में महंत श्री महेंद्रानंद गिरि जी महाराज ने संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी बताते हुए कहा कि संस्कृत का अध्ययन व्यक्ति के जीवन में संस्कार और मन में संतोष उत्पन्न करता है।

संस्कृत भारती का यह आयोजन अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं नागरिकों को देववाणी संस्कृत के अध्ययन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, अपितु ईश्वरीय ज्ञान की भाषा है।

हम सभी देवस्वरूप हैं और इस दिव्य भाषा के अध्ययन एवं संवर्धन में अपना योगदान देना चाहिए।

संस्कृत सरल, सहज और भारत की आत्मा : श्री कमल मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के राजस्थान क्षेत्र संगठन मंत्री श्री कमल जी ने कहा कि संस्कृत अत्यंत लचीली और सहज भाषा है।

इसमें वाक्य विन्यास की पर्याप्त स्वतंत्रता है, जिससे इसे सरलता से सीखा और बोला जा सकता है। संस्कृत भारत की आत्मा तथा भारतीय संस्कारों का प्रमुख आधार है।

उन्होंने अपने लंबे संगठनात्मक अनुभव का उल्लेख करते हुए संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार और जनसामान्य तक इसकी पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

संस्कृत में शपथ लेना गौरव की बात : सांसद सी.पी. जोशी संस्कृत हमारी गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक पहचान की भाषा -सांसद जोशी।

मुख्य अतिथि सांसद सीपी जोशी ने संस्कृत के प्रति अपने श्रद्धाभाव को व्यक्त करते हुए कहा कि संसद में तीन बार संस्कृत में शपथ ग्रहण करना उनके लिए गौरव का विषय रहा है। संस्कृत हमारी गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक पहचान की भाषा है। उन्होंने संस्कृत के प्रति अपनी निरंतर सेवा और श्रद्धा का उल्लेख करते हुए सभी को संस्कृत पढ़ने तथा इसके प्रचार-प्रसार में सहभागी बनने के लिए प्रेरित किया।

संस्कृत भारतीय संस्कृति की आधारशिला : प्रो. कैलाश डागा।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि संस्कृत अत्यंत सरल एवं सहज भाषा है। संस्कृत में अपना नाम और परिचय देना भी सहजता से सीखा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विदेशों में संस्कृत के प्रति रुचि निरंतर बढ़ रही है। विश्व के विभिन्न देशों में संस्कृत के विश्वविद्यालय एवं अध्ययन केंद्र स्थापित हो रहे हैं तथा संस्कृत पर शोध कार्य भी हो रहे हैं।

यह भारत के लिए गौरव का विषय है। संस्कृत हमारी सांस्कृतिक आधारशिला है।

प्रत्येक भारतीय को संस्कृत का अध्ययन कर अपने जीवन में भारतीय मूल्यों एवं संस्कारों को आत्मसात करना चाहिए।

संस्कृत को गरिमा प्रदान करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी : प्रो. नीरज शर्मा विशिष्ट अतिथि एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष तथा पीजी कला संकाय के डीन प्रो. नीरज शर्मा ने कहा कि संस्कृत की वर्तमान स्थिति के लिए हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

संस्कृत को उचित गरिमा प्रदान करने के लिए सरकार के स्तर पर भी आवश्यक प्रयास होने चाहिए। उन्होंने संस्कृत को गौरवशाली भाषा बताते हुए इसके अध्ययन और प्रचार-प्रसार को व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिभाओं का हुआ सम्मान, पाणिनि पुरस्कार एवं संस्कृति गौरव सम्मान प्रदान समारोह में संस्कृत विषय में बोर्ड परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को व संस्कृत में पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाली प्रतिभाओं को महर्षि पाणिनि पुरस्कार तथा संस्कृत और संस्कृति में निरंतर सेवारत डॉ नारायण सिंह राव को संस्कृति गौरव सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया।

संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।

संस्कृत सप्ताह की उपलब्धियों का प्रस्तुत हुआ प्रतिवेदन कार्यक्रम संयोजक श्रीयांश कंसारा ने संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने सप्ताहभर आयोजित कार्यक्रमों, विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता तथा संस्कृत भारती के प्रयासों की जानकारी दी।

इस अवसर पर संत एंथनी विद्यालय के वरिष्ठ वर्ग के प्रथम स्थान प्राप्त समूह ने भारत माता के वैभव का वर्णन करते हुए संस्कृत समूहगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।

कार्यक्रम का संचालन महानगर मंत्री नरेंद्र शर्मा ने संस्कृत भाषा में किया। मंगल कुमार जैन ने कल्याण मंत्र प्रस्तुत किया तथा विभाग संयोजक दुष्यंत नागदा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

अतिथियों का परिचय एवं स्वागत संस्कृत भारती के प्रांत संपर्क प्रमुख डॉ. यज्ञ आमेटा ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, संस्कृत अनुरागी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्य रूप से नरेंद्र शर्मा, दुष्यन्त कुमार नागदा, डॉ यज्ञ आमेटा, मंगल कुमार जैन, डॉ दुर्गा कुमावत, डॉ रेणु पलीवाल, रेखा सिसोदिया, श्रीयांश कंसारा , सत्य प्रिय, चैन शंकर दशोरा, रविन्द्र सिंह रूपावत, गौरव साहू, भूपेंद्र शर्मा, सुनीता कंवर, डॉ हिमांशु भट्ट, डॉ कुलदीप जोशी।

संस्कृत भारती द्वारा आयोजित यह सम्मेलन संस्कृत भाषा के प्रति नई पीढ़ी में रुचि जागृत करने, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

इन्हें मिला महर्षि पाणिनि पुरस्कार बोर्ड परीक्षा में संस्कृत विषय में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी दिल्ली पब्लिक स्कूल से चैतन्य योगेश गवली,एलिस कुडू ,मेधा छापरवाल, कनिका राहुल देशमुख, सेंट्रल एकेडमी स्कूल से मानसी गंधर्व , रॉकफोर्ड हाई स्कूल से चित चंपावत व काव्य गिरी गोस्वामी।

विद्या वाचस्पति पीएचडी के लिए डॉ दुर्गा कुमावत, डॉ कुलदीप जोशी, डॉ जूली सोनी, डॉ पूनम कुमारी, डॉ बसंता नंदवाना, डॉ पूजा आचार्य, डॉ मीनाक्षी त्रिवेदी, डॉ रेनू कुंवर चौहान, डॉ नानू राम मीणा , डा पवन कुमार खराडी, डॉ अंकिता आर्य, डॉ प्रेम खगड़ी, डॉ सुशीला लौहार, डॉ चिरायु जोशी, डॉ नीतु डामोर को सम्मानित किया गया।

यह रहे प्रतियोगिताओं के विजेता - -श्लोक प्रतियोगिता कनिष्ठ वर्ग में जीएनपीएस की अमाया ओझा प्रथम और स्कॉलर्स एरेना की नियति चौबीसा द्वितीय रहीं। डीपीएस की प्रिशा शर्मा तथा रॉकवुड्स की कविशा चौधरी संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहीं। वरिष्ठ वर्ग में डीपीएस की मेदिनी आमेटा ने प्रथम, एमएमपीएस की द्युति दीक्षित ने द्वितीय और एमएमपीएस के सिद्धार्थ धोंधड़ा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

-संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता कनिष्ठ वर्ग में हैप्पी होम की अंकिता कुंवर एवं समूह प्रथम, डीपीएस की दुर्गा शेट्टी एवं समूह द्वितीय तथा संत एंथनी की अनन्या कटारिया एवं समूह तृतीय स्थान पर रहे।

वरिष्ठ वर्ग में सेंट एंथनी के अनुग्रह डामोर एवं समूह ने प्रथम स्थान हासिल किया। डीपीएस की ईशा अरोड़ा, नीरजा मोदी स्कूल की प्राची मुखी, स्कॉलर्स एरेना की मेघना साहू तथा महाराणा आचार्य संस्कृत महाविद्यालय की समृद्धि के समूह संयुक्त रूप से द्वितीय रहे।

सीडलिंग मॉडर्न स्कूल की भवि साहू एवं समूह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

-श्लोक आधारित चित्रकला प्रतियोगिता कनिष्ठ वर्ग में एमएमपीएस की रिद्धि रंजन प्रथम रहीं। वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय (सवीना) की हितांशी मेघवाल तथा सीडलिंग मॉडर्न स्कूल की जिया निभनानी द्वितीय रहीं।

मिरांडा स्कूल के कुंदन सिंह देवड़ा, संत एंथनी की हविष्का और संत जोसफ के मोहम्मद तफसीर संयुक्त रूप से तृतीय स्थान पर रहे। वरिष्ठ वर्ग में आलोक स्कूल (हिरण मगरी) के उदय धाकड़ प्रथम रहे।

सेंट्रल एकेडमी की हुविष्का शर्मा तथा डीपीएस की इशा परदेशी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। रॉकवुड्स की अन्वी लोढ़ा, जीएनपीएस की नेहल शर्मा और सीडलिंग मॉडर्न स्कूल की विभूति जैन संयुक्त रूप से तृतीय रहीं।