उदयपुर। श्रावणी पूर्णिमा एवं विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर संस्कृत भारती, उदयपुर द्वारा आयोजित ‘संस्कृत सप्ताह’ का शुभारंभ संस्कृति रक्षार्थ ‘रक्षा सूत्र कार्यक्रम’ के साथ हुआ। कार्यक्रम में जगदीश मंदिर परिसर से लेकर पुलिसकर्मियों तक रक्षा सूत्र बांधकर भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति संकल्प का संदेश दिया गया।
जगदीश मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में समाजजनों एवं श्रद्धालुओं की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं ने यह भाव प्रकट किया कि रक्षा सूत्र केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, संस्कार, प्रकृति, समाज और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प का भी सूत्र है।
इस अवसर पर मंदिर में पहुंचे विदेशी पर्यटकों ने भी भारतीय परंपरा के प्रति उत्सुकता दिखाई और उन्होंने सहर्ष रक्षा सूत्र बंधवाकर इस अनूठी सांस्कृतिक पहल में सहभागिता की।
इससे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भारतीय भावना का सुंदर दृश्य देखने को मिला।
कार्यक्रम में संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-परंपरा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना की आधारशिला है। संस्कृत को जन-जन की भाषा और व्यवहार की भाषा बनाने के संकल्प के साथ संस्कृत भारती निरंतर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समाज को संस्कृत एवं संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रही है।
इसके पश्चात संस्कृत भारती का दल अंबामाता पुलिस थाने पहुंचा, जहां थानाधिकारी हुकम सिंह के निर्देशन और सानिध्य में पुलिस अधिकारियों एवं जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई। समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात तत्पर रहने वाले पुलिसकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि जो समाज की रक्षा करते हैं, उनके साथ संस्कृति का यह रक्षा सूत्र भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक है।
इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने भी विश्व संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं देते हुए संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा संस्कृत में निहित है और संस्कृत को व्यवहारिक एवं जनभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के प्रयासों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
रक्षा सूत्र से आगे—संस्कृति रक्षा का संकल्प संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर कहा कि आज आवश्यकता केवल पर्व मनाने की नहीं, बल्कि पर्व के पीछे छिपे जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने की है। रक्षा सूत्र बांधते हुए प्रत्येक व्यक्ति से यह भाव जगाने का प्रयास किया गया कि— “संस्कृतस्य संरक्षणं, संस्कृतेः संवर्धनम्, राष्ट्रस्य रक्षणम् च अस्माकं सामूहिकं दायित्वम्।”
अर्थात् संस्कृत का संरक्षण, संस्कृति का संवर्धन और राष्ट्र की रक्षा हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
कार्यक्रम संयोजक श्रीयांश कंसारा एवं डॉ. रेनू पालीवाल ने बताया कि संस्कृत सप्ताह के माध्यम से संस्कृत को केवल शैक्षणिक विषय के रूप में नहीं, बल्कि जीवन, व्यवहार और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सप्ताहभर होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, समाजजनों एवं विभिन्न वर्गों को संस्कृत से जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा।
कार्यक्रम में दुष्यंत नागदा, नरेंद्र शर्मा, संरक्षक डॉ भगवती शंकर व्यास, डॉ रेनू पालीवाल सत्यप्रिय, डॉ हिमांशु भट्ट, डॉ. यज्ञ आमेटा, चैन शंकर दशोरा, सहित संस्कृत भारती के कार्यकर्ता एवं समाजजन उपस्थित रहे।
कल होगा पौधारोपण कार्यक्रम संस्कृत सप्ताह के आगामी कार्यक्रमों में कल 29 को पौधारोपण डीपीएस में मध्यान्ह 12:00 बजे।
29 अगस्त — पौधारोपण कार्यक्रम डपीएस अध्ययन 12:00 बजे।
30 अगस्त — पत्राचार द्वारा संस्कृत अभियान की पहल 31 अगस्त — श्लोक प्रतियोगिता एमपीएस विद्यालय 1 सितंबर — संस्कृत समूह गीत प्रतियोगिता आलोक विद्यालय सेक्टर 11 2 सितंबर — श्लोक आधारित चित्रकला प्रतियोगिता रॉकवुड्स हाई स्कूल 3 सितंबर — संस्कृति चेतना यात्रा , निंबार्क माहाविद्यालय से।
12 सितंबर — संस्कृत सम्मेलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह, जिसमें संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों एवं प्रतिभाओं का सम्मान किया जाएगा।
