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Udaipur News

दूध तलाई स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पर कार्मिकों को समझाए पानी की बर्बादी रोकने के तरीके

जिले के विभिन्न ब्लॉक में पेयजल स्रोतों से लिए गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल

मुख्य बिंदु
  • ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह के तहत मंगलवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के तत्वावधान में जल संरक्षण एवं पेयजल गुणवत्ता को लेकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।
  • इसके तहत शहर के दूध तलाई स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पर विभागीय कार्मिकों को जल शोधन प्रक्रिया के दौरान होने वाली पानी की बर्बादी रोकने और वेस्ट वाटर का प्रभावी उपयोग करने के तरीकों की जानकारी दी गई।
  • वहीं, जिले के विभिन्न ब्लॉक में पेयजल स्रोतों से पानी के नमूने एकत्रित कर उनकी गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया भी की गई।
  • विभाग के अधीक्षण अभियंता रवींद्र कुमार चौधरी ने बताया कि दूध तलाई स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पर आयोजित कार्यक्रम में कार्मिकों को बताया गया कि जल शोधन की प्रक्रिया के दौरान फिल्टर की सफाई एवं अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं में जो पानी निकलता है, उसका पुनः उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।
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दूध तलाई स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पर कार्मिकों को समझाए पानी की बर्बादी रोकने के तरीके

उदयपुर। ब्रिक्स सतत जीवनशैली सप्ताह के तहत मंगलवार को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के तत्वावधान में जल संरक्षण एवं पेयजल गुणवत्ता को लेकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।

इसके तहत शहर के दूध तलाई स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पर विभागीय कार्मिकों को जल शोधन प्रक्रिया के दौरान होने वाली पानी की बर्बादी रोकने और वेस्ट वाटर का प्रभावी उपयोग करने के तरीकों की जानकारी दी गई।

वहीं, जिले के विभिन्न ब्लॉक में पेयजल स्रोतों से पानी के नमूने एकत्रित कर उनकी गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया भी की गई।विभाग के अधीक्षण अभियंता रवींद्र कुमार चौधरी ने बताया कि दूध तलाई स्थित वाटर फिल्टर प्लांट पर आयोजित कार्यक्रम में कार्मिकों को बताया गया कि जल शोधन की प्रक्रिया के दौरान फिल्टर की सफाई एवं अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं में जो पानी निकलता है, उसका पुनः उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है।

इस दौरान फिल्टर प्रक्रिया में निकलने वाले वेस्ट वाटर को व्यर्थ बहाने के बजाय उसके संभावित पुनः उपयोग के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्मिकों को समझाया गया कि पानी का प्रत्येक बूंद कीमती है और उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है।कार्यक्रम के दौरान पेयजल की गुणवत्ता जांच भी की गई।

कार्मिकों को जल की शुद्धता बनाए रखने, नियमित जांच और जल संरक्षण के महत्व के बारे में बताया गया। साथ ही सभी कार्मिकों को पर्यावरण संरक्षण एवं पानी की बचत करने की शपथ दिलाई गई।

उन्हें अपने कार्यक्षेत्र के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी पानी का अनावश्यक उपयोग रोकने और दूसरों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।जिले भर में ब्लॉक स्तर पर लिए 10-10 सैम्पलउन्होंने बताया कि अभियान के तहत केवल शहर ही नहीं, बल्कि जिले के विभिन्न ब्लॉक में भी पेयजल गुणवत्ता को लेकर गतिविधियां आयोजित की गईं।

इस क्रम में जिलेभर में विभिन्न ब्लॉक में विभागीय कार्मिकों की ओर से पेयजल स्रोतों से 10-10 सैंपल एकत्रित किए गए, जिन्हें पानी की गुणवत्ता जांच के लिए लेबोरेटरी भेजा गया है।

इस पहल का उद्देश्य पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी रखने के साथ ही आमजन को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।पानी की बूंद बूंद को सहेजना होगाएसई चौधरी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

पानी की उपलब्धता सीमित है, ऐसे में जल शोधन से लेकर वितरण और दैनिक उपयोग तक हर स्तर पर पानी की बर्बादी रोकने के प्रयास किए जाने चाहिए।

घरेलू आरओ/ फिल्टर प्लांट से निकलने वाले पानी का उचित उपयोग सुनिश्चित करने और पेयजल स्रोतों की नियमित गुणवत्ता जांच जैसी गतिविधियां सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।