उदयपुर । केंद्रीय कारागृह उदयपुर में 1 से 7 नवंबर तक आयोजित ‘विकसित सतत् जीवनशैली सप्ताह 2026’ के तहत गुरुवार को पांचवें दिन प्लास्टिक मुक्त दिवस मनाया गया।
इस अवसर पर कारागृह को प्लास्टिक मुक्त बनाने तथा प्लास्टिक थैलियों के स्थान पर कपड़े एवं जूट के थैलों का उपयोग करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें अधिकारियों, कर्मचारियों सहित लगभग 1100 बंदियों ने भाग लिया।कार्यक्रम में जेल अधीक्षक राजपाल सिंह ने बंदियों एवं स्टाफ को प्लास्टिक से पर्यावरण और जीव-जंतुओं को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक पर्यावरण प्रदूषण की गंभीर समस्या है। प्लास्टिक न तो आसानी से गलता है और न ही मिट्टी व पानी में नष्ट होता है।
यह लंबे समय तक पर्यावरण को प्रदूषित करता रहता है तथा पशुओं और जलीय जीवों के लिए भी जानलेवा साबित होता है।
उन्होंने सभी से दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग बंद कर कपड़े एवं जूट के थैलों को अपनाने तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में सहयोग करने का आह्वान किया।इस दौरान बंदियों से मुलाकात करने आने वाले परिजनों को प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर कपड़े एवं जूट के थैलों में सामान लाने के लिए प्रेरित किया गया।
मुलाकात कराने वाले एवं तलाशी लेने वाले कार्मिकों को निर्देश दिए गए कि कोई भी सामान प्लास्टिक की थैली में अंदर नहीं ले जाया जाए।
प्लास्टिक की थैलियों से सामान निकालकर कपड़े एवं जूट के थैलों में रखकर ही कारागृह में प्रवेश दिया जाए।जेल अधीक्षक की प्रेरणा से मुलाकात के लिए आए परिजनों ने भी प्लास्टिक की थैलियों से सामान निकालकर कपड़े के थैलों में रखा और प्लास्टिक मुक्त कारागृह बनाने में सहयोग किया।
कार्यक्रम में कारापाल भगवान सहाय, अचलाराम भाटी, भामरलाल, उप कारापाल रणवीर सिंह, मुख्य प्रहरी, प्रहरी एवं बंदियों ने भाग लिया।
