उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, कुम्हारवाड़ा के तत्वावधान में देवेंद्र धाम स्थित महावीर समवशरण में धर्मसभा आयोजित हुई।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेंद्र मुनि ने कहा कि मनुष्य जिस शरीर पर गर्व करता है, वह पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश जैसे पंचतत्वों से निर्मित है और अंततः इन्हीं में विलीन हो जाता है।
जैन आगम में इसे ‘औदारिक शरीर’ कहा गया है, जिसका स्वभाव नश्वर है।उन्होंने कहा कि मानव जीवन अमूल्य है, लेकिन मनुष्य सांसारिक प्रपंचों में उलझकर इसकी सार्थकता भूल जाता है।
चिंताहरण रत्न के दृष्टांत के माध्यम से उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार किसान ने अज्ञानवश अमूल्य रत्न कौवे को उड़ाने में गंवा दिया, उसी प्रकार मनुष्य भी तुच्छ इच्छाओं के पीछे अपना बहुमूल्य जीवन नष्ट कर रहा है।डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध और नानक जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर मानवीय मूल्यों को अपनाना चाहिए।
केवल भौतिक विकास से शांति संभव नहीं, आध्यात्मिक संस्कार भी आवश्यक हैं।सभा में उपाध्याय रमेश मुनि, दीपेश मुनि सहित संघ पदाधिकारी व श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन ने बताया कि करनाल, लुधियाना और दिल्ली से आए अतिथियों का सम्मान किया गया। महामंत्री हिम्मत बडाला ने आगामी 5 तारीख को युवाचार्य महेंद्र जयंती पर सामूहिक एकाशन तप का आग्रह किया।
