उदयपुर | भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा को मजबूत करने तथा वंचित समुदायों के विद्यार्थियों तक आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की पहुंच बढ़ाने की दिशा में विज्ञान समिति उदयपुर द्वारा संचालित आचार्य रामानुजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में दिल्ली और ग्रेटर नोएडा की महिला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षिकाओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि विज्ञान समिति और विद्यालय उद्यम एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित इस पहल का उद्देश्य महिला शिक्षिकाओं को आधुनिक एवं उभरती तकनीकों में दक्ष बनाकर उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षिका, मार्गदर्शक और तकनीकी नेतृत्वकर्ता के रूप में विकसित करना है।
प्रशिक्षण के प्रमुख क्षेत्र प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निम्नलिखित क्षेत्रों में व्यावहारिक एवं परियोजना-आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा: रोबोटिक्स कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) त्रि-आयामी मुद्रण एवं डिजिटल निर्माण (3D Printing) ड्रोन प्रौद्योगिकी विद्युत परिपथ एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संगणकीय चिंतन (Computational Thinking) अभिकल्पना चिंतन (Design Thinking) डिजिटल निर्माण “सीखें–बनाएं–सिखाएं–नेतृत्व करें” मॉडल।
इस कार्यक्रम की विशेषता इसका “सीखें–बनाएं–सिखाएं–नेतृत्व करें” मॉडल है। इसके तहत शिक्षिकाएं स्वयं आधुनिक तकनीकों पर प्रयोग करेंगी, नमूने एवं उपयोगी मॉडल तैयार करेंगी और प्रशिक्षण के बाद दिल्ली तथा ग्रेटर नोएडा के सरकारी विद्यालयों एवं संसाधन-वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की गतिविधियां संचालित करेंगी।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर करके सीखने, प्रयोग करने, प्रश्न पूछने और वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायता मिलेगी।
विज्ञान समिति का दृष्टिकोण विज्ञान समिति के कुलप्रमुख डॉ के एल कोठारी ने कहा कि , “हमारा उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा को प्रयोगशाला तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंचाना है। महिला शिक्षिकाएं इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी।”
विद्यालय उद्यम एसोसिएशन का योगदान विद्यालय उद्यम संगठन के प्रबंध निदेशक कैलाश चंद्र रावल ने बताया कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में तकनीकी रूप से दक्ष शिक्षक-शिक्षिकाओं की अत्यंत आवश्यकता होगी और यही विकसित राष्ट्र की नींव रखेंगे।
विज्ञान उत्सव अभियान की विशेषज्ञ टीम प्रशिक्षण के दौरान शिक्षिकाओं को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल, रोचक और गतिविधि-आधारित तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए भी तैयार करेगी।
बहुगुणक प्रभाव वाला मॉडल यह पहल एक बहुगुणक प्रभाव वाले मॉडल के रूप में कार्य करेगी, जिसमें प्रशिक्षित महिला शिक्षिकाएं अपने ज्ञान और अनुभव को आगे सैकड़ों विद्यार्थियों तक पहुंचाएंगी। इस प्रकार आचार्य रामानुजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला केवल तकनीकी शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षकों, नवप्रवर्तकों और नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करने का मंच बनेगी।
