कोई भी निर्माण, कोई भी कार्यक्रम, कोई भी भोजन, कृषि, उद्योग और घर जल बिना नहीं होता। प्रदेश में इस वर्ष बहुत कम वर्षा हुई है तो जल दोहन भी बहुत अधिक होगा ऐसे में जन प्रतिनिधि ही उन्हें जल संरक्षण की राह दिखा सकते हैं।
उपरोक्त कथन वरिष्ठ जल मित्र नगर के एक मात्र केंद्रीय जल शक्ति
मंत्रालय द्वारा वाटर हीरो से सम्मानित डॉक्टर पी सी जैन ने कहा।
विद्यापीठ के मास्टर्स ऑफ सोशल वर्क के नव आगंतुक विद्यार्थियों को
आग्रह किया कि अपने सोशल वर्क में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देवे क्योंकि
जल बिना कोई भी सोशल वर्क संभव नहीं है। चार "ब" पर आधारित अपनी वार्ता में जल बना नहीं सकते तो बचाना है, बर्बाद ना करना है, और वर्षा काल में
बढ़ाना है।
हैंडपंप की जल आरती उतार कर, अदृश्य जल को दृश्य मान बनाकर उन्होंने
वॉटर फुटप्रिंट की व्याख्या की। एक A4 साइज के पेपर को बनाने में 10 लीटर पानी खर्च होता
है ऐसे कई उदाहरण देकर अदृश्य जल को सबको दिखा दिया और कहा कि हमें कहीं ना कहीं
इस पर भी सीमा लगानी पड़ेगी। प्लास्टिक और प्लास्टिक से बने बर्तनों में लंबे समय
तक पानी रखने पर माइक्रो प्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक शरीर के हर अंग और खून में मिलकर
कैंसर और कई घातक बीमारियों को पैदा कर रहा है। सामूहिक जल गीत गाकर कार्यक्रम
संपन्न हुआ।
स्वागत प्रोफेसर
अविनाश नागर ,डीन उदयपुर स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क, परिचय अनुकृति राव
अर्पिता रेणुका असिस्टेंट प्रोफेसर एंड फील्ड वर्कर कोऑर्डिनेटर ने दिया। , प्रोफेसर लालाराम जाट, प्रोफेसर नवल सिंह
राजपूत भी उपस्थित थे।
जलदूत- डिंपल, अर्पिता, रेणुका, अलका, तनीषा, प्रियांशी, हेमंत और लक्षित बने।
