*कानून व्यवसाय में वकीलों को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के पूर्व घोषित निर्णय उपलब्ध कराने,उनके संक्षिप्त नोट बनाने,अनुवाद करने तथा उपयोगिता आधारित उचित निर्णय लेने में मनुपात्रा जैसे ई डेटाबेस मंच ,ए आई टूल उपलब्ध करा रहे है जिससे वकीलों के काफी समय की बचत हो रही है।- ये विचार संगम विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय एवं स्कूल ऑफ लीगल स्टडी के संयुक्त तत्वावधान में 4 नवम्बर 2026 को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला- 'स्मार्ट नेविगेशन इन लीगल स्टडीज' के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो करुणेश सक्सेना ने व्यक्त किये।
कार्यशाला का शुभारंभ बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट सदस्य पलक मोदानी के स्वागत के साथ हुआ। उन्होंने कानून के शिक्षार्थियों को उन्नत ई-संसाधनों का उपयोग कर अपने क्षेत्र में दक्षता हासिल करने का आव्हान किया।
अध्यक्षता कर रहे प्रो. राजीव मेहता,अधिष्ठाता,स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कानून शिक्षा को भी आधुनिक डिजिटल तकनीक का लाभ लेकर परिस्कृत होने की आवश्यकता है।
कार्यशाला संयोजक डाॅ.अनिल शर्मा,चीफ लाईब्रेरीयन ने कहा कि आधुनिक तकनीकी युग में कानून के शिक्षार्थी को ए आई टूल को उपयोग करने में भी महारत हासिल करना आवश्यक है।
*मुख्य वक्ता मनुपात्रा के सेल्स हेड,ऋषभ जोहरी ने बताया कि मनुपात्रा आर्काईव में वर्ष 1710 से लेकर अभी तक के सभी लाखों की तादाद में कोर्ट के निर्णय संग्रहित है।जो कि आज की कोर्ट कार्यवाही में भी उचित संदर्भ प्रस्तुत कर निर्णय को प्रभावित कर रहे है।
इस अवसर पर संगम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा आलोक कुमार, प्रो.राज कुमार चतुर्वेदी,अधिष्ठाता,स्कूल ऑफ आर्ट्स एवं ह्यूमैनिटीज,समस्त संकाय सदस्य ,शोधार्थी एवं विद्यार्थियो ने कानून के ई संसाधनो के उपयोग आधारित प्रशिक्षण लिया।
