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राजस्थान विद्यापीठ में वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा

कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने वित्तीय स्थिति पर जताई चिंता, कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने सुधार प्रक्रिया की जानकारी दी

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राजस्थान विद्यापीठ में वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा

उदयपुर,  राजस्थान विद्यापीठ में वित्तीय, प्रशासनिक और अकादमिक व्यवस्थाओं को लेकर प्रबंधन ने व्यापक समीक्षा प्रक्रिया शुरू की है। शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने विश्वविद्यालय की वर्तमान वित्तीय स्थिति और पूर्व कुलपति एस.एस. सारंगदेवोत के कार्यकाल से जुड़े विभिन्न मामलों पर जानकारी साझा की। वहीं वर्तमान कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने विश्वविद्यालय की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

वित्तीय स्थिति को लेकर प्रबंधन की चिंता

कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि विश्वविद्यालय इस समय वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व कुलपति एस.एस. सारंगदेवोत के कार्यकाल के अंतिम दौर में विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति के संबंध में करीब 36 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी।

कुलाधिपति के अनुसार समीक्षा के दौरान सामने आया कि इस राशि में करीब 19 करोड़ रुपये ओवरड्राफ्ट के रूप में थे, जबकि लगभग 17 करोड़ रुपये कॉरपस फंड के रूप में बताए गए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक कॉरपस फंड की तुलना में यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है।

प्रबंधन के अनुसार वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए कर्मचारियों के वेतन भुगतान और अन्य नियमित दायित्वों के प्रबंधन के लिए प्राथमिकताएं तय की जा रही हैं।

वेतन भुगतान और एडवांस की समीक्षा

प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को दिए गए एडवांस भुगतान का भी मुद्दा सामने आया। प्रबंधन के अनुसार करीब चार करोड़ रुपये के एडवांस विभिन्न मामलों में दिए गए हैं, जिनकी अब समीक्षा की जा रही है।

कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने बताया कि विभिन्न विभागों को संबंधित वित्तीय मामलों की जानकारी दी गई है और एडवांस भुगतान से जुड़े दस्तावेजों एवं प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि समीक्षा के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रबंधन ने यह भी बताया कि कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए कुछ भुगतान और अतिरिक्त देयताओं की समीक्षा की गई है।

नियुक्तियों और सेवा मामलों की जांच

प्रेस वार्ता में पूर्व कुलपति एस.एस. सारंगदेवोत के कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों, वेतनमान और कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न सेवा मामलों पर भी सवाल उठाए गए।

कुलाधिपति ने कहा कि कुछ नियुक्तियों और कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है। वहीं कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से कार्यरत कुछ कर्मचारियों के नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों के अनुरूप व्यवस्थित करना प्राथमिकता है।

PhD और अकादमिक प्रक्रियाओं पर भी समीक्षा

विश्वविद्यालय में PhD, प्रवेश प्रक्रिया, शोध निर्देशन और अन्य अकादमिक गतिविधियों से संबंधित मामलों की भी समीक्षा किए जाने की जानकारी दी गई।

प्रेस वार्ता में कुछ मामलों में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। पूर्व कुलपति एस.एस. सारंगदेवोत का पक्ष भी इस प्रेस वार्ता में उपलब्ध नहीं कराया गया।

पूर्व कुलपति एस.एस. सारंगदेवोत के कार्यकाल को लेकर विवाद

प्रेस वार्ता में एस.एस. सारंगदेवोत के कार्यकाल को लेकर हुए विवाद की भी जानकारी दी गई। कुलाधिपति के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने के बाद इसके विस्तार को लेकर विश्वविद्यालय में विरोध और आंदोलन की स्थिति बनी थी। इसके बाद नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

कुलाधिपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय, प्रशासनिक और अकादमिक व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों की समीक्षा रिकॉर्ड और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जा रही है।

हाईकोर्ट की कार्यवाही का उल्लेख

प्रेस वार्ता में पूर्व कुलपति से जुड़े विवाद के हाईकोर्ट तक पहुंचने का भी उल्लेख किया गया। कुलाधिपति के अनुसार मामले में दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। बाद में पूर्व कुलपति के इस्तीफे को स्वीकार किए जाने की स्थिति बनी।

कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने बताया आगे का रोडमैप

कुलपति प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि विश्वविद्यालय की वित्तीय और प्रशासनिक स्थिति को व्यवस्थित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। वित्तीय दायित्वों, कर्मचारियों के एडवांस, नियुक्तियों और अकादमिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ कर्मचारियों और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करना है।

प्रो. मंजु मांडोत ने कहा कि राजस्थान विद्यापीठ एक पुरानी और महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्था है। उनका प्रयास है कि वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करते हुए विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि निरंतर प्रयासों से आने वाले महीनों में वित्तीय स्थिति को व्यवस्थित किया जा सकेगा।

मीडिया से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और सहयोग की अपील

कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने मीडिया और समाज के विभिन्न वर्गों से राजस्थान विद्यापीठ से जुड़े मामलों की तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने और संस्था को मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकालने में सहयोग की अपील की।

प्रबंधन ने कहा कि वित्तीय, प्रशासनिक और अकादमिक मामलों से जुड़े आरोपों की समीक्षा जारी है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।