उदयपुर। मेवाड़ के प्रसिद्ध पर्यावरण एवं वन्यजीव रक्षक और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. चमन सिंह चौहान को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए पद्मश्री राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है। पद्मश्री सम्मान उन्हें डाक के माध्यम से प्राप्त हुआ।
डॉ. चौहान पिछले करीब 28 वर्षों से उदयपुर और आसपास के लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र में वन्यजीव बचाव एवं संरक्षण अभियान से जुड़े हुए हैं। वे उदयपुर स्थित वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के अध्यक्ष हैं। अपने लंबे सेवा अभियान के दौरान उन्होंने वन्यजीव संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए राजस्थान के हजारों युवाओं को इस अभियान से जोड़ा।
वन्यजीव संरक्षण को बनाया जनअभियान
डॉ. चौहान के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पहलू वन्यजीव संरक्षण में महिला शक्ति की भागीदारी भी रहा है। उन्होंने महिलाओं को वन्यजीव बचाव एवं संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने का कार्य किया और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए।
उदयपुर में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। इनमें बायोलॉजिकल पार्क, वाइल्ड डिस्पेंसरी, सरपेंटोरियम (सर्प गृह) और घायल पशु-पक्षियों एवं अन्य वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर जैसे कार्य प्रमुख हैं।
इसके साथ ही उदयपुर के गुलाब बाग में फलों के पेड़ों को ठेके पर देने की व्यवस्था पर स्थायी रोक लगाने जैसे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों में भी डॉ. चौहान के नेतृत्व और सक्रिय भूमिका का उल्लेख किया जाता है।
पहले भी मिल चुके हैं कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान
वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यों के लिए डॉ. चमन सिंह चौहान को इससे पहले भी अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें अमृता देवी बिश्नोई अवार्ड, महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन सम्मान, भारत भूषण इंटरनेशनल अवार्ड, नेल्सन मंडेला राष्ट्रीय पुरस्कार, इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, सक्सेस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और यूनिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सहित जिला एवं राज्य स्तरीय सम्मान शामिल हैं।
उदयपुर के लिए गौरव का अवसर
करीब तीन दशकों से वन्यजीवों के बचाव, संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के लिए सक्रिय डॉ. चौहान को पद्मश्री सम्मान मिलने से उदयपुर के पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों में खुशी है। उनके लंबे समय से किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने को उदयपुर और राजस्थान के लिए गौरव का विषय बताया जा रहा है।
प्रमुख तथ्य:
- 28 वर्ष से वन्यजीव संरक्षण अभियान से जुड़े
- उदयपुर के आसपास करीब 100 किलोमीटर क्षेत्र में रेस्क्यू कार्य
- राजस्थान के हजारों युवाओं को अभियान से जोड़ा
- वन्यजीव संरक्षण में महिला सहभागिता को बढ़ावा
- बायोलॉजिकल पार्क, वाइल्ड डिस्पेंसरी और सरपेंटोरियम जैसे कार्यों में भूमिका
- कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से पूर्व में सम्मानित
- अब पद्मश्री राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित
