उदयपुर, बदलते वैश्विक परिदृश्य में भविष्य की शिक्षा कैसी हो तथा शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी विकास, रोजगार के अवसरों और मानवीय मूल्यों को किस प्रकार जोड़ा जाए, इन विषयों पर विचार-विमर्श के उद्देश्य से विद्या भवन सोसायटी एवं हर्थ एडवाइजर्स के संयुक्त तत्वावधान में 1 से 3 नवंबर तक तीन दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन ‘सीड 2.0 : फॉर सस्टेनिंग फ्यूचर्स’ का आयोजन जेएसडब्ल्यू एनर्जी एवं वीवा फाउंडेशन के सहयोग से किया गया।
सम्मेलन में देश के 22 संस्थानों से आए 33 प्रतिभागियों ने छह प्रमुख सत्रों में भविष्य की शिक्षा, पर्यावरण, खाद्य प्रणाली, तकनीक, रोजगार एवं मानवीय मूल्यों पर चर्चा की। इस दौरान प्रतिभागियों ने विद्या भवन के प्रकृति साधना केंद्र एवं कृषि विज्ञान केंद्र का शैक्षणिक भ्रमण किया।
प्रकृति साधना केंद्र में सेवानिवृत वन अधिकारी तथा पर्यावरणविद् डॉ. सतीश शर्मा एवं डॉ. रमणीक लाल श्रीमाल ने प्रकृति आधारित शिक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह केंद्र एक जीवंत प्रयोगशाला है, जहाँ विद्यार्थी वनस्पतियों, जीव-जंतुओं, पारिस्थितिकी तंत्र एवं खाद्य श्रृंखला को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझ सकते हैं।
भविष्य की खाद्य प्रणाली पर चर्चा के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. प्रफुल्ल भटनागर ने केंद्र की कृषि, पौधशाला, डेयरी एवं पशुपालन संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी।
उन्होंने समन्वित कीट प्रबंधन, समन्वित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र विद्यार्थियों के लिए ‘करके सीखने’ का उत्कृष्ट माध्यम बन सकता है।
प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का भ्रमण कर व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।
नागालैंड स्थित क्लाइमेट चेंज सेंटर के डॉ. अतोहो जाकलू ने बताया कि उनके केंद्र ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति बच्चों में जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से स्थानीय भाषा में ‘पानी-पहाड़’ विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करवाया है।
विद्या भवन के शैक्षणिक सलाहकार शशांक वीरा के मार्गदर्शन में आयोजित सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं तकनीकी विकास के शिक्षा पर प्रभाव, शिक्षण पद्धति, परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली तथा भविष्य के रोजगार पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, रचनात्मकता, निर्णय क्षमता एवं तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
अंतिम दिन प्रतिभागियों ने समूहों में पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण शिक्षा, खाद्य भविष्य, तकनीक एवं शिक्षण पद्धति तथा खेल, स्वास्थ्य एवं रोजगार जैसे विषयों पर सुझाव एवं कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।
समापन सत्र में विद्या भवन सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार तायलिया ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न संस्थाओं के संयुक्त प्रयास एवं विचारों का आदान-प्रदान आवश्यक है।
उन्होंने सम्मेलन के अनुभवों एवं सुझावों को अधिकाधिक संस्थाओं तक पहुंचाने की बात कही।
मुख्य संचालक एवं पूर्व आईएएस राजेंद्र भट्ट ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं विद्यार्थियों के विकास के लिए ऐसे आयोजन जारी रखने का आह्वान किया।
