वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में भगवान महावीर के शासन का महत्व बताया, महावीर-गौतम की मित्रता से दिया समर्पण का संदेशउदयपुर। मनुष्य बाहरी दुनिया की सुरक्षा के लिए अनेक उपाय करता है, लेकिन अपने मन और भावों की सुरक्षा करना भूल जाता है।
मन के भीतर चलने वाला विचारों का शोर आत्मा की आवाज सुनने में बाधा बनता है। यदि व्यक्ति भगवान महावीर के शासन का महत्व समझकर आध्यात्मिक जीवन अपनाए, तो वह आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
यह विचार साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने सोमवार को वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में नियमित व्याख्यान के दौरान श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।साध्वी श्रीजी ने कहा कि राजा अपने राज्य की रक्षा के लिए किला बनवाता है, किसान फसल बचाने के लिए खेत के चारों ओर बाड़ लगाता है और व्यक्ति अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाता है।
लेकिन मनुष्य अपने भाव जगत की रक्षा और मन की शक्ति बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करता।
बाहरी नकारात्मकता की तरह मन के भीतर का शोर भी आत्मा और परमात्मा की आवाज सुनने से रोकता है।उन्होंने कहा कि व्यक्ति संसार से जुड़ने और अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए अनेक सपने देखता है, लेकिन उसे यह भी सोचना चाहिए कि क्या उसने आत्मकल्याण के लिए परमात्मा से जुड़ने का सपना देखा है।
ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सकता है।साध्वी श्रीजी ने भगवान महावीर और गौतम स्वामी की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि गौतम स्वामी ने जब केवलज्ञान प्राप्ति के समय के बारे में पूछा, तो भगवान महावीर ने कहा कि यह अभी संभव है, लेकिन इसके लिए उनके प्रति मोह छोड़ना होगा।
इस पर गौतम स्वामी ने कहा कि उन्हें ऐसा केवलज्ञान नहीं चाहिए, जिसके लिए भगवान को छोड़ना पड़े।उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद समस्त जीवों के कल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए देशना दी।
आत्मकल्याण के लिए परमात्मा के प्रति श्रद्धा और समर्पण आवश्यक है। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।