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शब्दों से परे है संवाद की शक्ति:विलास जानवे

उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय के मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग द्वारा “बियॉन्ड वर्ड्स: द पावर ऑफ नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन” (शब्दों

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शब्दों से परे है संवाद की शक्ति:विलास जानवे

उदयपुर।   महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर के सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय के मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग द्वारा “बियॉन्ड वर्ड्स: द पावर ऑफ नॉन-वर्बल कम्युनिकेशन” (शब्दों से परे: अशाब्दिक संचार की शक्ति) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया । प्रारम्भ  में  महाविद्यालय की अधिष्ठाता एवं कार्यक्रम की संरक्षक डॉ. सरला लखावत ने कार्यक्रम के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संचार मानव जीवन का आधार है तथा प्रभावी संवाद के लिए केवल शब्दों का प्रयोग ही पर्याप्त नहीं है। इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, आत्मविश्वास, रचनात्मकता तथा प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना भी है।

कार्यक्रम की सह-संयोजक एवं विभाग की एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. गायत्री तिवारी ने बताया कि अशाब्दिक संचार मानव विकास की प्रक्रिया का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पहलू है। व्यक्ति की भाव-भंगिमाएँ, चेहरे के हाव-भाव, शारीरिक भाषा एवं व्यवहार भी उसकी भावनाओं और विचारों को व्यक्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी संचार के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय संवेदनाओं, आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। विशेष रूप से शैशवावस्था एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था में बच्चे अपनी आवश्यकताओं, भावनाओं और अनुभवों को शब्दों की अपेक्षा चेहरे के भावों, संकेतों, गतिविधियों तथा व्यवहार के माध्यम से अधिक व्यक्त करते हैं।

कार्यक्रम की सह-संयोजक एवं विभाग की इंचार्ज डॉ. मोनिका राय ने कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि हमारे दैनिक जीवन में अनेक बार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जहाँ शब्दों से अधिक हमारी आँखें, चेहरे के भाव, हाथों के संकेत और शारीरिक मुद्राएँ संवाद करती हैं। उन्होंने बताया कि अशाब्दिक संचार की समझ विद्यार्थियों को बेहतर श्रोता, संवेदनशील शिक्षक तथा प्रभावी संप्रेषक बनने में सहायता करती है। विशेष रूप से बाल विकास, पारिवारिक परामर्श, शिक्षा एवं सामाजिक संबंधों के क्षेत्र में इसका व्यावहारिक महत्त्व अत्यधिक है। उन्होंने कहा कि इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुभवात्मक एवं रचनात्मक ढंग से यह समझने का अवसर मिलेगा कि बिना बोले भी भावनाओं और विचारों को प्रभावशाली तरीके से व्यक्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री विलास जानवे, जो मूकाभिनय कला के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं. प्रारम्भ  में  अपनी  टीम  के  साथियों  श्री  मनीष  शर्मा  और  श्री  अमित  मेनारिया  के  साथ कलात्मक प्रस्तुतियों जैसे  कविता ,भूमिका  खेल आदि  विधाओं   के माध्यम से अशाब्दिक संचार के विभिन्न आयामों को  मूकाभिनय द्वारा  यह संदेश दिया कि मौन भी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हो सकता है तथा बिना शब्दों के भी आनंद, दुःख, आश्चर्य, संवेदना और विभिन्न मानवीय भावनाओं को प्रभावी ढंग से संप्रेषित किया जा सकता है।

कार्यक्रम के आयोजन में श्रीमती मोनिशा सज्जन, श्रीमती अरुणा व्यास, श्रीमती अंजना कुमावत एवं श्रीमती रेखा राठौड़ आयोजन समिति के सदस्यों के रूप में सक्रिय सहयोग प्रदान किया ।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों में अशाब्दिक संचार के प्रति जागरूकता विकसित करना, उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को प्रोत्साहित करना तथा मानवीय संबंधों में संवेदनशील एवं प्रभावी संवाद के महत्त्व को रेखांकित करना जिसमे इन  सभी  अभिभावकों  ने  अत्यंत  उत्साह  से  भाग  लिया।

कार्यक्रम  के अंत  में  श्रीमती मोनिशा सज्जन द्वारा धन्यवाद ज्ञापित  किया गया।