जैसलमेर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर द्वारा प्रवर्तित ‘‘नालसा (बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 में उल्लेखित लक्ष्यों की अनुपालना में अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, (जिला एवं सेशन न्यायाधीश), जैसलमेर ओमी पुरोहित व सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललित पुरोहित के निर्देशन में न्यायरक्षक खेमेन्द्रसिंह भाटी ने राजकीय कन्या छात्रावास, डेड़ानसर रोड़, जैसलमेर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया।
शिविर में अध्यक्ष, बाल कल्याण समिति मुकेश व्यास, सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग, हिम्मतसिंह कविया, परवेज खां, मूलाराम, पूना चौहान सदस्य बाल कल्याण समिति उपस्थित रहे।
शिविर में न्यायरक्षक खेमेन्द्रसिंह भाटी ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा देश में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए बाल-अनुकूल न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘‘नालसा (बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सेवाएं) योजना, 2024’’ लागू की गई है।
इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रत्येक बच्चे, विशेषकर देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों, कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरांे और दिव्यांग बच्चों को त्वरित, सक्षम और बाल-अनुकूल कानूनी सहायता व न्याय सुलभ कराना है।
न्यायिक कार्यवाही के दौरान बच्चों को भय और तनाव से बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को आयु-उपयुक्त और बाल-संवेदनशील बनाया गया है, इस हेतु देश के प्रत्येक जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत् ‘‘बच्चों के लिए विशेष विधिक सेवा इकाई’’ स्थापित की गई है।
इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित पैनल अधिवक्ता, पैरा लीगल वालंटियर्स और कानूनी विशेषज्ञ शामिल होते है। इस योजना में दिव्यांग बच्चों को कानूनी व सामाजिक न्याय दिलाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इसमें सुलभ बुनियादी ढांचा, सांकेतिक भाषा/विशेष शिक्षकों की सहायता और समावेशी सेवाएं प्रदान करने पर जोर दिया गया है।
शिविर में न्यायरक्षक ने यह भी बताया कि जिले में स्थित विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, जिला बाल संरक्षण इकाई और पुलिस को साथ मिलाकर एक मजबूत बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया गया है, जो बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, नशीली दवाओं के दुरुपयोग और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मुद्दों के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध है।
उन्होंने शिविर में उपस्थित बालिकाओं को नालसा के संदेश से अवगत करवाते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय और भारतीय संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप, यह योजना यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी कानूनी या प्रशासनिक कार्यवाही में ‘‘बच्चे का सर्वाेत्तम हित’’ ही सर्वाेपरि प्राथमिकता होगी। नालसा का लक्ष्य यह है कि न्याय की पहुंच से कोई भी बच्चा वंचित न रहे।
