नई दिल्ली । रोजाना सफर करने वाले लाखों रेल यात्रियों के लिए ट्रेन में भोजन के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन लिमिटेड ने क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह महत्वपूर्ण साझेदारी एक सख्त, तकनीक-आधारित और स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट व्यवस्था तैयार करती है। इसका उद्देश्य आइआरसीटीसी द्वारा संचालित सभी मोबाइल (ट्रेन) और स्थिर (स्टेशन) कैटरिंग इकाइयों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करना है।
इस रणनीतिक गठबंधन के तहत, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया प्रमाणित पेशेवरों को तैनात करेगा, जो बिना पूर्व सूचना दिए हर तिमाही और छमाही में गहन निरीक्षण करेंगे।
ये ऑडिट यह सुनिश्चित करेंगे कि ‘‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’’ के नियमों और अंतरराष्ट्रीय खाद्य मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।
इस समझौता ज्ञापन पर आइआरसीटीसी के महाप्रबंधक (गुणवत्ता और परियोजनाएं) श्री सुधीर वारियर और क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सलाहकार/प्रमुख-पीपीआइडी श्री सुब्रोतो घोष ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर एनएबीएल के सीईओ श्री रामानंद नागेंद्र शुक्ला, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहायक महासचिव श्री मोहित पाढ़ी, आइआरसीटीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री राहुल हिमालयन और आइआरसीटीसी के निदेशक (खानपान सेवाएं) श्री मनोज कुमार शर्मा भी उपस्थित थे।
डेटा में छेड़छाड़ को रोकने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, ऑडिट प्रक्रिया में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के अत्याधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जाएगा।
निरीक्षक एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करेंगे, जिसमें अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग, टाइम-स्टैम्पिंग और फोटो के रूप में सबूत दर्ज करने की सुविधा होगी।
ऑडिट रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर जमा करनी होगी, जिससे कामकाज में कमियों का तुरंत पता चल सके और नियमों का पालन न करने वाले वेंडरों के खिलाफ तत्काल सुधारात्मक और निवारक कार्रवाई शुरू की जा सके।जनता को मिलने वाले मुख्य लाभ और प्रभाव के क्षेत्रट्रेन में भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं इसके तहत ट्रेनों में स्वतंत्र और सख्त जांच यह सुनिश्चित करती है कि यात्रियों को खराब गुणवत्ता वाला भोजन न मिले।
स्टेशनों पर एक समान गुणवत्ता योजना में सभी प्रमुख स्टेशनों पर स्थित खानपान इकाइयों में खाना पकाने के माहौल का पूर्ण मानकीकरण (ेजंदकंतकप्रंजपवद) किया गया है, जिससे हर जगह एक जैसी बेहतरीन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।
विक्रेता की सख्त जवाबदेही के तहत डिजिटल सबूतों के साथ 24 घंटे के भीतर सौंपी जाने वाली रिपोर्ट यह सुनिश्चित करती है कि केटरिंग लाइसेंसधारियों पर तुरंत जुर्माना लगाया जा सके या सुधार के कदम उठाए जा सकें।
साफ-सफाई और पहनावे के स्पष्ट नियमों में ज़मीनी स्तर पर की जाने वाली जाँच यह सुनिश्चित करेगी कि कर्मचारी चिकित्सकीय रूप से फिट हों, ज़रूरी सुरक्षा उपकरण पहनें और मेहमानों के साथ पेशेवर तरीके से पेश आएं।
स्वच्छ भंडारण के नियमों का पालना के तहत बेहतर निगरानी के ज़रिए यह पक्का किया जाएगा कि शाकाहारी और मांसाहारी कच्ची सामग्री पूरी तरह अलग-अलग रखी जाए, भोजन को सही तापमान पर रखा जाए और कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) की व्यवस्था पुख्ता हो।
भविष्य के लिए तैयार अपग्रेड, यह व्यापक समझौता एक ऐसा ढांचा तैयार करता है, जिससे आइआरसीटीसी भविष्य में आसानी से कई संयुक्त कार्यक्रम शुरू कर सके।
इनमें यात्रियों की संतुष्टि से जुड़े सर्वे, बुनियादी ढांचे का ऑडिट और कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण शामिल हैं।
इस साझेदारी पर बात करते हुए, प्रतिनिधियों ने बताया कि फब्प् के पास बड़े पैमाने पर जटिल सार्वजनिक निगरानी परियोजनाओं-जैसे ‘‘स्वच्छ सर्वेक्षण’’ और एफएसएसएआई के लिए पूरे भारत में दूध और खाद्य पदार्थों की निगरानी को सफलतापूर्वक पूरा करने का बेजोड़ अनुभव है।
यही खूबी उन्हें रेलवे की इस राष्ट्रव्यापी हॉस्पिटैलिटी अपग्रेड प्रक्रिया का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। यह साझेदारी एक पारदर्शी और ‘‘यात्री-प्रथम’’ भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय रेलवे में परोसा जाने वाला हर भोजन सुरक्षा और स्वास्थ्य के उच्च मानकों के अनुरूप हो।
