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मन्दिर की अर्थव्यवस्था पर विश्व की प्रथम पीएचडी डिम्पी को

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने डिम्पी सुहालका Economies of Temple: A Study of Selected Indian Temples of Mewar and Malwa Region/

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मन्दिर की अर्थव्यवस्था पर विश्व की प्रथम पीएचडी डिम्पी को
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मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने डिम्पी सुहालका “Economies of Temple: A Study of Selected Indian Temples of Mewar and Malwa Region”/ “मन्दिर की अर्थव्यवस्थाएँ: मेवाड़ और मालवा क्षेत्रों के चयनित भारतीय मन्दिरों का एक अध्ययन” विषय पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की।

डिम्पी ने यह शोध कार्य प्रबन्ध अध्ययन संकाय के प्रो. (डॉ.) अनिल कोठारी के निर्देशन में पूर्ण किया। मन्दिर की अर्थव्यवस्था विषय पर यह विश्व की प्रथम पीएचडी है।

इस शोध के अन्तर्गत में उन्होंने मेवाड़ क्षेत्र के श्रीनाथ जी, श्री साँवरिया सेठ जी और मालवा क्षेत्र के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन), श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (ओंकारेश्वर) के व्यापक क्षेत्रीय, राजकीय एवं राष्ट्रीय आर्थिक प्रभाव पर शोध अध्ययन किया।

साथ ही मेवाड़ के अधिष्ठात्र देव श्री एकलिंग जी, माँ त्रिपुरा सुंदरी (बाँसवाड़ा) और श्री पावापुरी जैन तीर्थ एवं जीव मैत्री धाम (सिरोही) के आर्थिक प्रभाव पर भी प्रकाश डाला ।

इस शोध के माध्यम से यह प्रमाणित किया गया कि भारतीय मंदिर केवल धर्म, आस्था और आध्यात्म के केंद्र नहीं, बल्कि स्थानीय, क्षेत्रीय, राजकीय एवं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विकास केंद्र भी हैं।

डिम्पी सुहालका की यह शोध उपलब्धि भारतीय मन्दिरों के बहुआयामी आर्थिक एवं सामाजिक योगदान को अकादमिक विमर्श के केन्द्र में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस शोध के माध्यम से यह दृष्टिकोण सामने आया है कि भारत की मन्दिर परम्परा सदियों से धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका, व्यापारिक गतिविधियों, सेवा-क्षेत्र और क्षेत्रीय व राष्ट्रीय आर्थिक विकास को गति प्रदान कर रही है।

डिम्पी सुहालका ने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया कि भगवान के मन्दिरों पर शोध कार्य के लिये उन्हें चुना गया, उन्होंने इसका श्रेय महादेव, माता-पिता, गुरु, परिवार जन एवं शुभचिंतकों को दिया। उनकी इस महत्वपूर्ण अकादमिक उपलब्धि पर शिक्षा, प्रबन्धन एवं भारतीय ज्ञान अध्ययन से जुड़े विद्वानों और शुभचिन्तकों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।