नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली इन दिनों नवरात्रि और दुर्गा पूजा के रंगों में रंगी हुई है।
कहीं गुजराती गरबों की थाप पर थिरकते कदम हैं, तो कहीं मां दुर्गा के भव्य पंडालों में उमड़ती श्रद्धा और भक्ति का सैलाब। पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंगीत, आकर्षक विद्युत सज्जा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दिल्ली राजधानी के वातावरण को उत्सवमय बना दिया है।
यह दृश्य राजधानी की बहुसांस्कृतिक पहचान और भारत की विविधता में एकता की परंपरा को भी रेखांकित करता है।
गरबा-डांडिया में गुजराती संस्कृति की छटा नवरात्र के अवसर पर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में गुजराती गरबा और डांडिया आयोजनों की विशेष धूम है। रंग-बिरंगे चनिया-चोली, कढ़ाईदार घाघरे, पारंपरिक आभूषण और पुरुषों की केड़िया-पगड़ी से सजे प्रतिभागी मां दुर्गा की आराधना के साथ गोल घेरे में गरबा करते दिखाई दे रहे हैं। ढोल की थाप और पारंपरिक गुजराती गीतों के बीच डांडिया की खनक उत्सव में चार चांद लगा रही है।
दिल्ली में गुजराती समाज के विभिन्न गरबों के साथ ही शाह ऑडिटोरियम,गुजरात अपार्टमेंट,गुजरात विहार,जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, मेजर ध्यानचंद स्टेडियम, राजवाड़ा, पीसीओआई क्लब, चाणक्यपुरी वसंत विहार स्थित ललित महाजन स्कूल में 16 से 18 अक्टूबर तक आयोजित ‘रंगताली-2026’ में गरबा, डांडिया और रास के साथ गुजराती खानपान तथा सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया है।
वहीं, पूर्वी दिल्ली के यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित ऑरिएट बैंक्वेट हॉल में 16 से 19 अक्टूबर तक गुजराती गरबा एवं डांडिया उत्सव आयोजित किया जा रहा है।
इन आयोजनों में परिवारों और युवाओं की भागीदारी नवरात्र की सामाजिक लोकप्रियता को दर्शाती है।
दुर्गा पूजा पंडालों में आस्था और कला का संगम दूसरी ओर, राजधानी नई दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव धार्मिक आस्था के साथ कला, संगीत और सामुदायिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित कर रहा हैं।
बंगाली समुदाय की दुर्गा पूजा ने भी राजधानी दिल्ली को विशेष रंग प्रदान किया है। दक्षिण दिल्ली में कालका जी के निकट चितरंजन पार्क दुर्गा पूजा के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।
यहां आकर्षक पंडाल, कलात्मक प्रतिमाएं, रोशनी की सजावट, धाक की गूंज और पारंपरिक आरती श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। पूजा के साथ बंगाली व्यंजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद भी लिया जा रहा है।
इसी प्रकार उत्तर दिल्ली के कश्मीरी गेट क्षेत्र में दुर्गा पूजा की ऐतिहासिक परंपरा विशेष महत्व रखती है। यहां पारंपरिक शैली में मां दुर्गा की प्रतिमा और पूजा-अर्चना की विरासत पीढ़ियों से संरक्षित है।
सांस्कृतिक एकता का संदेश दिल्ली की इन उत्सवमय शामों का महत्व केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है। गुजरात का गरबा, बंगाल की दुर्गा पूजा और उत्तर भारत की नवरात्र परंपराएं एक साथ राजधानी दिल्ली और निकटवर्ती एनसीआर क्षेत्रों में परस्पर सौहार्द के साथ दिखाई देती हैं। विभिन्न राज्यों से आकर बसे लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखते हुए दूसरे समुदायों के उत्सवों में भी भागीदारी करते हैं।
हालांकि, नई दिल्ली और निकटवर्ती एनसीआर क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ के बीच यातायात प्रबंधन, पार्किंग और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक चुनौती बनी हुई है।
दिल्ली पुलिस द्वारा दुर्गा पूजा के दौरान चितरंजन पार्क और ग्रेटर कैलाश-द्वितीय के कुछ क्षेत्रों में 16 से 20 अक्टूबर तक शाम चार बजे से मध्यरात्रि तक यातायात प्रतिबंधों की विभिन्न सूचनाएं दी गई है।
कुल मिलाकर, राजधानी में गुजराती गरबों और दुर्गा पंडालों की रौनक समृद्ध भारतीय संस्कृति की जीवंतता का परिचय दे रही है। यहां ये उत्सव केवल नृत्य, संगीत और सजावट नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, सामाजिक मेल-मिलाप और राष्ट्रीय एकता का साझा उत्सव भी बन गए है।
