उदयपुर। नवरात्रि के पावन पर्व पर एनिमल प्रोटेक्शन सोसायटी, उदयपुर की किरण भावसार एवं डॉ. माला मट्ठा ने अष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन की परंपरा को एक अनूठे और प्रेरणादायक अंदाज़ में मनाया। उन्होंने गायों की पूजा कर उन्हें हरा चारा एवं हलवा-पूरी खिलाया तथा श्वानों को भोजन करवाकर समाज को जीव दया, करुणा और पशु संरक्षण का संदेश दिया।
इस अनूठी पहल के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि सच्ची पूजा केवल मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जीव के प्रति प्रेम, दया और संवेदना रखना भी ईश्वर की सच्ची आराधना है।
किरण भावसार एवं डॉ. माला मट्ठा ने कहा कि जीव दया ही सबसे बड़ी पूजा है। जिस प्रकार हम अपने त्योहारों को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं, उसी प्रकार इन खुशियों में बेजुबान जीवों को भी शामिल करना चाहिए। गायें और श्वान भी भगवान की संतान हैं। उन्हें भी इस धरती पर जीने, खुश रहने, प्रेम पाने और सुरक्षित जीवन बिताने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने समाज से अपील की कि त्योहारों और हर खुशी के अवसर पर जरूरतमंद पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करें तथा उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाएं। बेजुबान जानवर अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनकी देखभाल करना और उन्हें सुरक्षित वातावरण देना हम सभी की जिम्मेदारी है।
सोसायटी की इस पहल ने नवरात्रि के आध्यात्मिक संदेश को जीव सेवा से जोड़ते हुए यह प्रेरणा दी कि धार्मिक आस्था तभी सार्थक होती है, जब उसमें सभी जीवों के प्रति करुणा और सम्मान का भाव हो।
संदेश: “हर खुशी में बेजुबानों को शामिल करें, क्योंकि ये भी भगवान के बच्चे हैं। इन्हें भी जीने, खुश रहने और प्यार पाने का पूरा हक है। जीव दया ही सबसे बड़ी पूजा है।”
