उदयपुर। देवी भागवत कथा में नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने माँ महागौरी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, करुणा और मानवता का संदेश दिया। प्रवचन में उन्होंने माँ महागौरी की तपस्या, सिंह के समर्पण और ऋषि कन्या अपाला की प्रेरक कथा के माध्यम से निःस्वार्थ सेवा का मर्म समझाया।
माँ पार्वती ने भगवान शिव द्वारा परिहास में काली कहे जाने पर कठोर तपस्या का संकल्प लिया और हिमालय की गुफा में साधना करने लगीं। इसी दौरान एक भूखा सिंह वहाँ पहुँचा।
वह माँ को अपना शिकार बनाने आया था, लेकिन उनकी साधना से प्रभावित होकर वहीं ठहर गया। दिन, महीने और वर्ष बीत गए, पर सिंह ने न उनकी तपस्या भंग की और न उन्हें कोई कष्ट पहुँचाया।
माँ की तपस्या पूर्ण होने पर उसके समर्पण से प्रसन्न होकर उन्होंने उसे अपना वाहन बना लिया और सिंहवाहिनी कहलाई।
अग्रवाल ने ऋग्वेद में वर्णित ऋषि कन्या अपाला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि त्वचा रोग के कारण समाज और पति से उपेक्षा सहने वाली अपाला को उसके पिता महर्षि अत्रि ने स्नेहपूर्वक अपनाया।
इंद्र से वरदान माँगने का अवसर मिलने पर भी अपाला ने पहले अपने पिता के स्वास्थ्य और खेतों की समृद्धि की कामना की।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्य उसके रंग, रूप, बीमारी या शारीरिक अक्षमता से नहीं, बल्कि उसके भीतर की संवेदना, सद्गुणों और मानवीय व्यवहार से आँका जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सोमवार प्रातः 10 बजे नारायण सेवा संस्थान के वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी परिसर में 501 दिव्यांग कन्याओं का महापूजन किया जाएगा। संस्थान शारदीय नवरात्र में दिव्यांग कन्याओं की शल्य चिकित्सा, पुनर्वास और सम्मान के माध्यम से सेवा एवं समर्पण की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। यह पहल इस भाव को साकार करती है कि सेवा केवल पूजा का विधान नहीं, बल्कि मानवता के प्रति संवेदना और सम्मान का संकल्प है।
