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Udaipur News

भटके हुए जीवों को धर्म और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं गुरुःमुनि आदित्य सागर

सेक्टर-14 महावीर भवन में धर्मसभा एवं शांति विधान का आयोजन, अनुकम्पा योजना से अब तक 265 परिवार जुड़े

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भटके हुए जीवों को धर्म और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं गुरुःमुनि आदित्य सागर

उदयपुर। सेक्टर-14 स्थित महावीर भवन में विराजित मुनि 108 आदित्य सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु भटके हुए लोगों को सही राह दिखाने वाले पथ प्रदर्शक होते हैं।

अरिहंत और सिद्ध वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन आचार्य, उपाध्याय एवं मुनिराज धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देकर साधकों का मार्गदर्शन करते हैं।

गुरु का सानिध्य जीवन को सही दिशा देने के साथ धर्म, संयम और सदाचार के प्रति जागरूक बनाता है।ट्रस्ट के महामंत्री भूरीलाल जैन ने बताया कि मुनि श्री के प्रवास के द्वितीय दिवस श्री जी के अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद मंगलाचरण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ धर्मसभा का शुभारंभ हुआ।

दीप प्रज्ज्वलन का पुण्यार्जन शांतिलाल वेलावत ने प्राप्त किया। मुनि श्री के पद प्रक्षालन का लाभ कीर्तिलाल मुंडलिया परिवार तथा शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन पन्नालाल देवड़ा परिवार को मिला।

वहीं, मुनिश्री की आरती का लाभ श्री महावीर जैन युवा परिषद को प्राप्त हुआ।अध्यक्ष भंवरलाल मुंडलिया एवं कार्यकारिणी सदस्यों ने भीलवाड़ा, कोटा, जयपुर, इंदौर सहित विभिन्न स्थानों से पधारे श्रद्धालुओं का स्वागत एवं अभिनंदन किया।झंडारोहण के साथ हुआ शांति विधानमुनिश्री के सानिध्य में शांति विधान का आयोजन झंडारोहण के साथ किया गया।

झंडारोहण का पुण्यार्जन इंदरलाल मुंडलिया परिवार को प्राप्त हुआ। संगीतकार मनीष एंड पार्टी के सुमधुर संगीत के साथ विधान की धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई जा रही हैं।

विधान में सौधर्म इंद्र-इंद्राणी बनने का सौभाग्य राकेश कुमार एवं लीला देवी मुंडलिया को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का मंच संचालन राजेश देवड़ा ने किया।उन्होंने बताया कि समाज की अनुकम्पा योजना में अब तक 265 परिवार सहयोग प्रदान कर चुके हैं।

योजना में विशेष योगदान देने वाले साधर्मी नंदलाल मुंडलिया सहित अन्य सहयोगी परिवारों का समाज की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। धर्मसभा एवं शांति विधान के आयोजन में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के माध्यम से धर्म, सेवा, सहयोग और समाज में परस्पर सद्भाव की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।