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कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ में महिला किसान दिवस का आयोजन

132 कृषक महिलाओं एवं विद्यार्थियों ने लिया भाग

मुख्य बिंदु
  • कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ द्वारा महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें जिले की 132 कृषक महिलाओं, कृषकों एवं ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
  • कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ.
  • शंकर लाल जाट, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, चित्तौड़गढ़, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश धाकड़, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, चित्तौड़गढ़ तथा केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ.
  • रतन लाल सोलंकी ने कहा कि महिला किसान दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषक महिलाओं में कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें कृषि विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
  • उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार के पोषण स्तर को बेहतर बनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • वर्तमान समय में महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, इसलिए कृषि क्षेत्र भी उनकी सक्रिय भागीदारी से अछूता नहीं रहना चाहिए।
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कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ में महिला किसान दिवस का आयोजन

उदयपुर। कृषि विज्ञान केन्द्र, चित्तौड़गढ़ द्वारा महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें जिले की 132 कृषक महिलाओं, कृषकों एवं ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. शंकर लाल जाट, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, चित्तौड़गढ़, विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश धाकड़, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, चित्तौड़गढ़ तथा केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतन लाल सोलंकी ने किया।

कार्यक्रम में डॉ. रतन लाल सोलंकी ने कहा कि महिला किसान दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य कृषक महिलाओं में कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें कृषि विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार के पोषण स्तर को बेहतर बनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वर्तमान समय में महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, इसलिए कृषि क्षेत्र भी उनकी सक्रिय भागीदारी से अछूता नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से केन्द्र द्वारा समय-समय पर महिलाओं के लिए विभिन्न कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. शंकर लाल जाट ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता एवं पोषण सुरक्षा के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि महिलाएं किचन गार्डन के माध्यम से घर पर ही पौष्टिक सब्जियों का उत्पादन कर सकती हैं, जिससे परिवार की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ आर्थिक बचत भी संभव है। उन्होंने केन्द्र द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी देते हुए महिलाओं से कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि श्री मुकेश धाकड़ ने कृषक महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं को अपने कार्यक्षेत्र में समानता के अधिकार का उपयोग करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। चाहे वे कामकाजी महिलाएं हों या गृहिणियां, सभी को अपनी क्षमताओं का विकास कर समाज की प्रगति में योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम सहायक श्रीमती दीपा इन्दौरिया ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए महिला सशक्तीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत की प्रथम महिला चिकित्सक डॉ. आनंदीबाई जोशी, देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, प्रथम महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति अन्ना चांडी तथा अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। खेतों में अनेक कृषि कार्य महिलाओं के सहयोग से संपन्न होते हैं, फिर भी वे कई बार कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे नहीं आ पाती हैं। उन्होंने महिलाओं से कृषि प्रशिक्षण एवं योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी भागीदारी और पहचान मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम सहायक श्री संजय कुमार धाकड़ ने सामाजिक कुरीतियों को त्यागने तथा बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित सभी कृषकों, कृषक महिलाओं एवं रावे छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को कृषि तकनीकों, पोषण सुरक्षा, किचन गार्डन, महिला सशक्तीकरण एवं आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।