उदयपुर | महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के तत्वावधान में सिटी पैलेस म्यूज़ियम, उदयपुर में ‘थ्रेड्स ऑफ हर लाइफ’ (उनके जीवन की डोर) प्रदर्शनी का आयोजन 14 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक छोटा दरीखाना में किया जा रहा है। यह प्रदर्शनी मेवाड़ की जनजातीय महिलाओं की कलात्मक परंपराओं, जीवनानुभवों और समकालीन महिला कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों को एक मंच पर प्रस्तुत करती है।
मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान, श्रीजी हुज़ूर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी, महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन ने कहा, “यह प्रदर्शनी महिलाओं की कला, सृजनशीलता और मेवाड़ की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके योगदान का उत्सव है।
फाउंडेशन शिक्षा को प्रोत्साहित करने और महिलाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाने वाले मंचों का समर्थन करते हुए नई पीढ़ी की महिलाओं को अपनी आकांक्षाएँ साकार करने, सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और मेवाड़ के भविष्य में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाने हेतु प्रतिबद्ध है।”
फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मयंक गुप्ता ने बताया कि प्रदर्शनी का शीर्षक ‘थ्रेड्स ऑफ हर लाइफ’ उन संबंधों, अनुभवों और परंपराओं का प्रतीक है, जो महिलाओं के जीवन को आकार देते हुए पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ते हैं।
प्रदर्शनी में जनजातीय वस्त्रों, कढ़ाई और मांडणा जैसी पारंपरिक कलाओं के माध्यम से महिलाओं के दैनिक जीवन, अनुष्ठानों, प्रकृति से जुड़ाव और सामुदायिक ज्ञान को दर्शाया गया है।
‘शिक्षांतर’ और ‘कमली ट्राइब’ जैसी संस्थाओं के प्रयास पारंपरिक कौशल को नए अवसरों से जोड़ने की संभावनाएँ प्रस्तुत करते हैं। वहीं, डिम्पल चंडात और चंद्रिका परमार की कृतियाँ मांडणा को समकालीन दृष्टिकोण देती हैं।
तान्या शर्मा का कार्य आधुनिक स्त्री की बदलती पहचान, स्वतंत्रता और आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करता है, जबकि सीप चपलोत उदयपुर और झील पिछोला के संदर्भ में महिलाओं के शहरी अनुभवों को सामने लाती रही हैं।
वर्ष 1969 में स्थापित महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन की सांस्कृतिक संरक्षण परंपरा को आगे बढ़ाती यह प्रदर्शनी विरासत और आधुनिकता के बीच संवाद स्थापित करती है। यह महिलाओं के कला-कौशल, ज्ञान, देखभाल और रचनात्मक योगदान को सम्मान देते हुए मेवाड़ की जीवंत सांस्कृतिक पहचान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
