उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान आदिनाथ और भरत चक्रवर्ती के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को वैराग्य, संयम और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिग्रह के प्रति अत्यधिक आसक्ति व्यक्ति को दुखों की ओर ले जाती है। संसार के भोग क्षणिक सुख प्रदान करते हैं, जबकि संयम और आत्मचिंतन जीवन को सही दिशा देते हैं।
क्षणिक सुखों की आसक्ति दुखों का कारण, संयम और संस्कारों से मिलता है आत्मकल्याण का मार्गःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान आदिनाथ और भरत चक्रवर्ती के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को वैराग्य, संयम और आत्मकल्याण का संदेश
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में मंगलवार को आयोजित नियमित धर्मसभा में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने भगवान आदिनाथ और भरत चक्रवर्ती के प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को वैराग्य, संयम और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परिग्रह के प्रति अत्यधिक आसक्ति व्यक्ति को दुखों की ओर ले जाती है। संसार के भोग क्षणिक सुख प्रदान करते हैं, जबकि संयम और आत्मचिंतन जीवन को सही दिशा देते हैं।