उदयपुर, गीतांजलि इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज (गिट्स ), डबोक, उदयपुर में सेमीकंडक्टर तकनीक, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेजिंग और भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के उभरते अवसरों पर केंद्रित दो दिवसीय कार्यशाला सेमीपैक 1.0 का शुभारंभ हुआ।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक चिप निर्माण तकनीक, पारंपरिक एवं उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेजिंग, आउट सोर्स सेमीकंडक्टर असेम्ब्ली एवं टेस्ट तथा इस क्षेत्र में उपलब्ध कौशल विकास, अनुसंधान और रोजगार के अवसरों से परिचित कराना है ।उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की कार्यशाला पूरे राजस्थान में पहली बार की जा रही है।
संस्थान के निदेशक डॉ. एस. एम. प्रसन्ना कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर आधारित उभरती तकनीकों से परिचित कराने और भविष्य के औद्योगिक अवसरों के लिए तैयार करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिसके तहत कार्यक्रम में सेमीकंडक्टर स्किल कमेटी एवं इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयर डॉ. अश्वनी कुमार अग्रवाल रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे।
श्री अग्रवाल ने कहा कि भारत सरकार सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए देश में विभिन्न प्रकार की परियोजनाएं ला रही है।
जिसमे प्रमुख परियोजनाये गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और उसके प्रौद्योगिकी साझेदार पी एस एम सी की सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब परियोजना शामिल है।
गुजरात के साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की मेमोरी चिप असेंबली एवं टेस्टिंग इकाई, और कायनेस की चिप पैकेजिंग परियोजना प्रमुख है साथ ही असम के जागीरोड में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग इकाई स्थापित की जा रही है।कुंदन स्विच गियर के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री हेमंत जैन ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता कर भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की संभावनाओं, भविष्य की औद्योगिक रूपरेखा और इस क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी कौशल के महत्व पर अपने विचार साझा किए।
एमबीए निदेशक डॉ. पी. के. जैन ने विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ प्रबंधन, उद्यमिता और व्यावसायिक सोच के साथ भविष्य में आने वाली औद्योगिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने को कहा।
कार्यक्रम के संयोजक एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो प्रदीप गर्ग के अनुसार इस कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के 250 से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभाग करके सेमीकंडक्टर फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, चिप असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग के बारे में जाना। इस प्रकार की तकनिकी कार्यशाला विभाग भविष्य में आगे कराता रहेगा।
इस अवसर पर वित्त नियंत्रक श्री बी एल जांगिड़ ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग का भविष्य मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस , डेटा सेंटर, दूरसंचार, रक्षा, चिकित्सा उपकरण और औद्योगिक स्वचालन जैसे क्षेत्रों की बढ़ती मांग से जुड़ा है। जिससे उच्च कौशल के रोजगार सृजित होते हैं जो विद्यार्थियों के कॅरियर को बनानें में सहायता करते है। कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ शिवानी शर्मा द्वारा गया।
