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परमात्मा के गुणों को जानेंगे, तभी जागेगा उनके जैसा बनने का भावः साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शनिवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, श्रद्धा और जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा दी।

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उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में शनिवार को आयोजित नियमित प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, श्रद्धा और जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि जिस परमपिता के शासन में हमने जन्म लिया है, क्या हम वास्तव में उनके व्यक्तित्व और गुणों से परिचित हैं? परमात्मा के बाहरी स्वरूप और वैभव को जानने से अधिक आवश्यक उनके आंतरिक व्यक्तित्व, आदर्शों और गुणों को समझना है।

जब हम उनके गुणों को जानेंगे, तभी उनके जैसा बनने की प्रेरणा हमारे भीतर जागृत होगी।साध्वीश्री ने कहा कि हम परमात्मा की पूजा और आराधना तो करते हैं, लेकिन उनके गुणों, आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित धर्मशासन को गहराई से जानना भी जरूरी है।

परमात्मा के प्रति सच्चा श्रद्धाभाव और अहोभाव तभी उत्पन्न होगा, जब हम उनके वास्तविक व्यक्तित्व को समझेंगे।दुख आए तो सहें, लेकिन मन को अशांत न होने दें।

कई बार वर्तमान में कोई प्रत्यक्ष गलती न होने पर भी व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिसे जैन दर्शन में पूर्वजन्म के कर्मों के परिणाम से भी जोड़ा जाता है।उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से दुख सहना पड़ सकता है, लेकिन मानसिक रूप से उसे स्वयं पर हावी नहीं होने देना चाहिए।

परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति जागृत कर मन को शांत, संयमित और संतुलित बनाए रखना चाहिए। यही आत्मबल जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सहायक बनता है।

प्रवचन के दौरान साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भक्तिमय गीत प्रस्तुत किया।