‘कड़वे प्रवचन’ के लिए प्रसिद्ध 108 आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज की आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को सेक्टर-11 स्थित आदिनाथ भवन में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। ऋतु संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज की स्मृति को समर्पित पुस्तक ‘कड़वे प्रवचन प्रेम’ का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर डॉ. चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा द्वारा आचार्य श्री के जीवन और व्यक्तित्व पर आधारित 51 फीट लंबे पत्रक का भी विमोचन किया गया। डॉ. चित्तौड़ा ने बताया कि उन्होंने एक लघु पुस्तिका के साथ 51 फीट लंबे पत्रक के माध्यम से आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज के जीवन, विचारों, उपलब्धियों और संस्मरणों को संजोने का प्रयास किया है, ताकि उनकी स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकें।
डॉ. चित्तौड़ा के अनुसार, संत श्री तरुण सागर जी महाराज ने मात्र 13 वर्ष की आयु में 8 मार्च 1981 को गृह त्याग किया था। इसके बाद 20 जुलाई 1988 को राजस्थान के बागीदौरा में 20 वर्ष की आयु में दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की।
आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज अपने प्रभावशाली और निर्भीक ‘कड़वे प्रवचन’ के लिए देशभर में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने अनेक पुस्तकों की रचना की और जैन धर्म के सिद्धांतों एवं जीवन-दर्शन को सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रमों के माध्यम से भी जैन धर्म और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विचारों को व्यापक समाज तक पहुंचाया।
उनकी वाणी और उपदेशों ने समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित किया। उनके प्रवचनों में आध्यात्मिकता के साथ-साथ सामाजिक चेतना, नैतिकता, आत्मअनुशासन और जीवन मूल्यों का संदेश प्रमुखता से दिखाई देता था।
डॉ. चंद्र प्रकाश चित्तौड़ा ने अपनी इस कृति में आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज के जीवन परिचय, विभिन्न उपलब्धियों, संस्मरणों, पुस्तकों, विचारों और उनके व्यक्तित्व से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का सुंदर संकलन एवं चित्रण किया है। 51 फीट लंबे पत्रक को उनके जीवन और स्मृतियों का एक विशेष दृश्य दस्तावेज बताया गया।
कार्यक्रम में तरुण प्रभावन फाउंडेशन के संरक्षक राजकुमार अखावत सहित फाउंडेशन से जुड़े पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। इनमें संरक्षक अशोक जी शाह, अध्यक्ष विमल नाथू, महिला मंडल अध्यक्ष सुमन चित्तौड़ा, विजय मेहता, मुकेश सिपरिया, देवेंद्र कुमार छापिया सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
आचार्य श्री तरुण सागर जी महाराज की आठवीं पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक विरासत को श्रद्धापूर्वक स्मरण करने का अवसर बना। पुस्तक और 51 फीट लंबे पत्रक के माध्यम से उनके प्रेरणादायी जीवन एवं संदेशों को संरक्षित करने का प्रयास किया गया।
