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बुजुर्गाें का आदर करें, उनसे संवाद बनाए रखें, उन्हें अकेलापन महसूस न होने दें: सचिव पुरोहित

जैसलमेर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों की पालना में जिला एवं सेशन

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           जैसलमेर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशों की पालना में जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जैसलमेर ओमी पुरोहित के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चिकित्सा विभाग व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वाधान में जगमाल कल्याण विका संस्थान द्वारा संचालित वृ़द्धाश्रम, भणियाणा पर चिकित्सा व विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललित पुरोहित की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में जिला परिवीक्षा एवं समाज कल्याण अधिकारी कूंपसिंह, न्यायरक्षक खेमेन्द्रसिंह भाटी व सीएचओ भीमसिंह ने भाग लिया।

        शिविर में सचिव ने शिविर का उद्घाटन करते हुए, उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की थीम ‘‘दीर्घायु का युग: लंबे जीवन के लिए प्रणालियों पर पुनर्विचार’’ की महत्ता को समझाते हुए बताया कि इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज में बुजुर्गाें के योगदान का सम्मान करना, उनके अनुभवों का लाभ उठाना और वृद्धावस्था में उनके सामने आने वाली सामाजिक, आर्थिक व स्वास्थ्यक संबंधित चुनौतियों के प्रति जागरूकता फैलाना है। उन्होंने वृद्धजनों का मनोबल बढाते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में ‘‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव’’ और संयुक्त परिवार प्रणाली की समृद्ध परंपरा रही है, जहाँ बुजुर्गाें को परिवार के मार्गदर्शक, ज्ञान स्त्रोत और घर के मुखिया के रूप में सर्वाेच्च स्थान दिया जाता हैं।

        कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सचिव ने उपस्थित वृद्धजनों को बताया कि भारत सरकार ने उनकी संरक्षणार्थ ‘‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण और कल्याण अधिनिय, 2007 बनाया है, जिसके विधिक प्रावधानों के तहत् बच्चों और कानूनी वारिसों के लिए अपने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे अधिक) का भरण-पोषण (भोजन, आवास, वस्त्र, स्वास्थ्य सेवाएं) करना अनिवार्य है। इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु यदि किसी वारिस द्वारा वरिष्ठ नागरिक के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है तो, जिले में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के अधीन गठित ट्रिब्यूनल में आवेदन कर अपनी संपत्ति का हस्तांतरण जरिये ट्रिब्यूनल निरस्त करवा सकते हैं। इस अधिनियम के तहत बुजुर्गाें की उपेक्षा करने या उन्हें बेसहारा छोड़ने वाले परिजनों के लिए दंड और कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा उन्होंने नालसा (वरिष्ठ नागरिक विधिक सहायता) योजना, 2016 के तहत् आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई।

         कार्यक्रम में समाज कल्याण अधिकारी कूंपसिंह ने बताया कि राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अस्पतालों में अलग कतारों, मुफ्त दवा योजना (मुख्यमंत्री निःशुल्क योजना), मुफ्त चिकित्सा योजना (मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना) और जिला स्तर पर वृद्धाश्रम की व्यवस्था की गई है। राजस्थान सरकार द्वारा वृद्धजनों के लिए ‘‘मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना’’ चलाई जा रही है, जिसके पात्र बुजुर्गाें को प्रतिमाह वित्तीय सहायता पेंशन के रूप में प्रदान की जा रही है।

         कार्यक्रम का समापन सचिव द्वारा शिविर में उपस्थित वृद्धजनों को कंबल व वॉकिंग स्टिक प्रदान कर किया गया। उन्होंने उपस्थित वृद्धजनों के साथ निःशुल्क विधिक सहायता हेल्पलाईन नंबर 15100 के बारे में जानकारी देते हुए, समाज के सभी वर्गाें, युवाओं और भावी पीढ़ी से अपील की है कि वे अपने घर और आसपास के बुजुर्गाें का आदर करें, उनसे संवाद बनाए रखें तथा उन्हें अकेलापन महसूस न होने दें।