बांसवाड़ा। सुभाष नगर प्रोफेसर कॉलोनी स्थित इस्कॉन केन्द्र बांसवाड़ा में बलराम पूर्णिमा महोत्सव ओर रक्षाबंधन पर्व आचार्य अभय गौरांग दास एवम् अभिनंदन निमाई दास की अगुवाई में धूमधाम से मनाया गया।
प्रारम्भ में आचार्य विश्व आत्मा दास के सानिध्य में साधक, साधिकाओं, श्रद्धालुओं ने भगवान् योगेश्वर श्री कृष्ण,बलराम जी, राधा रानी , गौर निताई ,श्रील प्रभुपाद जी को रक्षा सूत्र बांध कर आशीर्वाद लिया।
इससे पहले साधिका श्रीमति रचना अरुण व्यास ने तुलसी नृसिंह आरती अभिषेक पूजा विधान माल्यार्पण कर किया।
*17 समितियों का गठन किया* इस अवसर पर साधक अरुण व्यास ने बताया कि 4 सितंबर 26 को जांगिड़ ब्राह्मण धर्मशाला प्रगति नगर स्थित में जन्माष्टमी पर्व हेतु आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने हेतु 17 समितियों का गठन मानस पंड्या,कुशाग्र निमाई दास के सानिध्य में साधक, साधिकाओं , श्रद्धालुओं में कार्य विभाजन किया गया।
जन्माष्टमी महोत्सव पर्व शाम 6 बजे से हरिनाम संकीर्तन, नृत्य प्रदर्शन, नाटक, कीर्तन और मटकी फोड़ कार्यक्रम होंगे। उन्होंने आव्हान किया कि दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ इसमें शामिल हों और अपने दिन को कृष्ण- भावना मय बनाएं।
*"नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की" धुन पर विशेष नृत्य-कीर्तन होगा* 4 सितंबर 26 जन्माष्टमी पर्व पर रात 11:30 बजे से भगवान श्री कृष्ण का अभिषेक समारोह और भोग अर्पण होगा, आधी रात 12 बजे आरती होगी और "नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की" धुन पर विशेष नृत्य-कीर्तन होगा।
*नंदोत्सव और श्रील प्रभुपाद का प्राकट्य दिवस* श्री व्यास ने बताया कि 5 सितंबर को सुबह 10:30 बजे से नंदोत्सव और श्रील प्रभुपाद का प्राकट्य दिवस मनाएंगे। दोपहर 12:30 बजे से सभी के लिए विशेष भोजन प्रसाद की व्यवस्था होगी।
*आध्यात्मिक चेतना के साथ दिन की शुरुआत करने पर जोर* इस अवसर पर आध्यात्मिक चेतना के साथ दिन की शुरुआत करने हेतु आचार्य अभय गौरांग दास ने सभी को संकल्प दिलाया कि हम अपने दिन की शुरुआत सुबह 4:30 बजे मंगला आरती, तुलसी आरती, जप सत्र, दर्शन आरती, गुरु पूजा और गीता भागवत भागवतम क्लास के साथ करेंगे।
इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान में कृपाली भट्ट, कुशल,डिम्पल,सुनील, अरुण व्यास, सुरेश, नैमिष, अक्षी, शाबुनी मंडल,दीपिका, विभा, अर्चना अनिता, भारती, चैतन्य, खुशी त्रिवेदी, चरण वंदना दासी, श्रीमति रचना व्यास, मानस, पंड्या, कुशाग्र,ओड्रिला, शिल्पा, शुभम,वारिश, वंशी, रतन देवी ने भाग लिया।
