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Jaislmer news

राज्य सरकार नें राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया

विख्यात विधिवेत्ता एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदनलाल भाटी की अध्यक्षता में प्रदेश में कार्य कर रहा 5 सदस्य ओबीसी आयोग

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जयपुर/जैसलमेर । राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने विख्यात विधिवेता एवं सेवानिवृत न्यायाधीश मदनलाल भाटी की अध्यक्षता में गठित 5 सदस्य राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के कार्यकाल को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया है।

ओबीसी आयोग के जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस आशय के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव ललित कुमार द्वारा आदेश जारी किया है।

आदेशानुसार आयोग के अध्यक्ष मदन लाल भाटी (सेनि.न्यायाधीश) सहित सदस्य मोहन मोरवाल, प्रो.राजीव सक्सैना,एडवोकेट श्री गोपाल कृष्णा, पवन मंडाविया का कार्यकाल भी 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया है।

आयोग के कार्यों के लिए टर्म ऑफ़ रेफरेंस (टीओआर) पृथक रूप से जारी किए जाएंगे।

गौरतलब है कि राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग को स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से 09 मई 2025 को राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का गठन किया गया था, जिसने हाल ही में 5 अगस्त को राज्य सरकार को निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़ी अपनी अनुशंसाए प्रस्तुत की है।

इसी अनुक्रम में इसे राज्य सरकार द्वारा अब 31 मार्च 2027 तक विस्तारित किया गया है। राज्य सरकार के इस आदेश से आयोग को अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित विषयों पर अपना कार्य निरंतर जारी रखने के लिए आवश्यक समय एवं व्यापक अवसर प्राप्त होगा।

आयोग द्वारा स्थानीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित विषयों पर निर्धारित कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस अवसर पर राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के अध्यक्ष मदन भाटी (सेनि.न्यायाधीश) ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग के कार्यकाल विस्तार से अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता और व्यापकता के साथ कार्य करने, समुचित अध्ययन, परीक्षण करने के व्यापक का अवसर प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा कि कार्यकाल विस्तार आयोग की जिम्मेदारी को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। आयोग आगामी अवधि में निर्धारित प्रदत्त दायित्वों का पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवैधानिक भावना के अनुरूप निर्वहन करते हुए समयबद्ध रूप से पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।