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बीजेपी का बजट अमीरों को फायदा, आम जनता को निराशा : इज़हार हुसैन

मुख्य बिंदु
  • उदयपुर केंद्र सरकार द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के माध्यम से पेश किया गया ताज़ा आम बजट एक बार फिर यह साबित करता है कि बीजेपी सरकार की नीतियां आम जनता के हित में नहीं, बल्कि चुनिंदा पूंजीपतियों और अमीर वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं।
  • यह बजट गरीबों, किसानों, युवाओं, मध्यम वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय—सभी के लिए निराशाजनक रहा है।
  • एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अंजुमन तालीमुल इस्लाम के जॉइंट सेक्रेटरी आर्किटेक्ट इज़हार हुसैन ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश आज महंगाई, बेरोज़गारी और बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन बुनियादी मुद्दों के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
  • उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों पर सरकार पूरी तरह मौन है।
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बीजेपी का बजट अमीरों को फायदा, आम जनता को निराशा : इज़हार हुसैन

उदयपुर केंद्र सरकार द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के माध्यम से पेश किया गया ताज़ा आम बजट एक बार फिर यह साबित करता है कि बीजेपी सरकार की नीतियां आम जनता के हित में नहीं, बल्कि चुनिंदा पूंजीपतियों और अमीर वर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं। यह बजट गरीबों, किसानों, युवाओं, मध्यम वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय—सभी के लिए निराशाजनक रहा है।

एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अंजुमन तालीमुल इस्लाम के जॉइंट सेक्रेटरी आर्किटेक्ट इज़हार हुसैन ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश आज महंगाई, बेरोज़गारी और बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन बुनियादी मुद्दों के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों पर सरकार पूरी तरह मौन है। युवाओं के लिए न तो स्थायी रोज़गार की कोई स्पष्ट योजना सामने आई है और न ही सरकारी नौकरियों को लेकर कोई ठोस रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। यह बजट युवाओं को अवसर देने के बजाय केवल आश्वासन तक सीमित है।

किसानों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इज़हार हुसैन ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), कर्ज़ माफी और खेती की बढ़ती लागत को कम करने को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है। पहले से ही आर्थिक संकट झेल रहे छोटे और सीमांत किसान इस बजट से स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भी इस बजट में कोई नई, ठोस और लाभकारी योजना नहीं लाई गई है। शिक्षा, रोज़गार, छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर सरकार की चुप्पी यह साफ दर्शाती है कि बीजेपी का “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केवल एक जुमला बनकर रह गया है, जिसका ज़मीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।