रक्षाबंधन: परम्परा या जरूरत?
भारत को यदि रिश्तों की भूमि कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहाँ त्योहार केवल तिथियाँ नहीं होते, वे जीवन-मूल्यों के उत्सव होते हैं। दीपावली प्रकाश का संदेश दे…
“हमें” के परिणाम
भारत को यदि रिश्तों की भूमि कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहाँ त्योहार केवल तिथियाँ नहीं होते, वे जीवन-मूल्यों के उत्सव होते हैं। दीपावली प्रकाश का संदेश दे…
उदयपुर। श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से देवेंद्र धाम में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि गुरु…
खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष, आत्मविश्वास और राष्ट्रभक्ति की पाठशाला हैभारत में प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिव…
उदयपुर। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की प्रमुख खेल पहल जिंक फुटबॉल अकादमी ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राजस्थान के ऐतिहासिक जावर स्टेडियम में विशेष कार्यक्रम आय…
नवोदित लेखकों के लिए मार्गदर्शक हैं प्रीति की प्रीत मय कविताएं ....थोड़ी ज़मीं - थोड़ा आसमानरहने दो, मेरी पंखों में थोड़ी परवाज रहने दो । इस दुनिया में है हस्त…
रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जिसमें एक छोटा-सा धागा रिश्तों की विशाल दुनिया को अपने भीतर समेट लेता है। यह केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने और बदले …
मनुष्य का संपूर्ण जीवन विश्वास की नींव पर खड़ा है। विश्वास वह अदृश्य शक्ति है जो परिवार को जोड़ती है, समाज में सहयोग उत्पन्न करती है और राष्ट्र के विकास का आधा…
“जिस समाज में ज्ञान पर किसी का एकाधिकार नहीं होता, वहाँ मनुष्य की पहचान उसकी जाति से नहीं, उसके ज्ञान, कर्म और चरित्र से होती है।”शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं …
उदयपुर। देवेन्द्र धाम में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने रक्षाबंधन पर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इंसान अपन…
रक्षाबंधन का त्योहार सदियों से भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक रहा है। राखी का धागा न केवल शारीरिक सुरक्षा का वचन है, बल्कि भावनात्मक सहारे…
उदयपुर। संसार में कोई चमत्कार नहीं होता है। व्यक्ति की बुद्धिमत्ता और चतुराई को ही लोग चमत्कार समझते हैं। ये विचार बढ़ेडी, मुजफ्फरनगर के पाणिनि आर्ष विद्याकुलम…
भारत की सांस्कृतिक विविधता की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यहां त्योहार केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं होते, बल्कि वे लोकजीवन, प्रकृति, आस्था, परंपरा और मानवीय र…