पं. राजवीर शास्त्री द्वारा सम्पादित विशुद्ध मनुस्मृति का नवीन संस्करण प्रकाशित
आर्यसमाज के अनुयायियों एवं मनुस्मृति-प्रेमियों के लिये हर्ष का समाचार है कि 45 वर्ष पूर्व सन् 1981 में प्रथमवार प्रकाशित और कई दशकों से अनुपलब्ध आर्यजगत के शीर…
“सत्यार्थप्रकाश” के परिणाम
आर्यसमाज के अनुयायियों एवं मनुस्मृति-प्रेमियों के लिये हर्ष का समाचार है कि 45 वर्ष पूर्व सन् 1981 में प्रथमवार प्रकाशित और कई दशकों से अनुपलब्ध आर्यजगत के शीर…
-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। हम वर्ष 1970 से 1975 के मध्य आर्यसमाज से जुड़े वा इसके सदस्य बने। आरम्भ में ही आर्यसमाज के सत्संगों में विद्वानों के उपदेश सुनना ह…
संसार में जितने मनुष्य हैं व अतीत में हुए हैं वह सब किसी देश विशेष में जन्में थे। उनसे पूर्व उनके माता-पिता व पूर्वज वहां रहते थे। जन्म लेने वाली सन्तान का कर्…
आर्यसमाज लक्ष्मण चौक, देहरादून का दो दिवसीय 60वां वार्षिकोत्सव आज दिनांक 4-10-2026 रविवार को सोल्लास सम्पन्न हो हुआ। आज प्रातः 8.00 बजे से पांच यज्ञ-वेदियों मे…
आर्यसमाज लक्ष्मण चौक, देहरादून का 60वां दो दिवसीय वार्षिकोत्सव आज दिनांक 3 -10-2026 को सोल्लास आरम्भ हुआ। आज प्रातः 8.00 बजे से तीन बड़ी यज्ञ वेदियों में यज्ञ क…
ऋषि दयानन्द के आगमन से पूर्व विश्व में लोगों को वेदों तथा ईश्वर सहित आत्मा एवं प्रकृति के सत्यस्वरूप का स्पष्ट ज्ञान विदित नहीं था। वेदों, उपनिषद एवं दर्शन आदि…
आज हम रविवार दिनांक 16 अगस्त, 2026 को आर्यसमाज धामावाला, देहरादून के रविवारीय सत्संग में सम्मिलित हुए। हमने आर्यसमाज में आर्यसमाज के युवा विद्वान आचार्य अनुज श…
हम जानते हैं कि सभी मनुष्यों एवं चेतन प्राणियों के शरीरों में एक चेतन आत्मा की सत्ता निवास करती है। मनुष्य के जन्म व गर्भकाल में आत्मा निर्माणाधीन शरीर में प्र…
मनुष्य प्रायः अपने माता, पिता, आचार्यों तथा सगे सम्बन्धियों को ही अपना मानते हैं। ईश्वर के विषय में मनुष्यों के भिन्न-भिन्न विचार होते हैं। अधिकांश को ईश्वर के…