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थाईलैंड में डॉ. यादव को मिला 'बेस्ट पेपर अवॉर्ड'

मुख्य बिंदु
  • महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय अन्तर्गत मृदा विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ.
  • यादव को थाईलैंड के फुकेत शहर में 15-20 जून 2026 के दौरान "कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में नवोन्मेषी एवं वर्तमान प्रगति 2026" विषय पर आयोजित अंतर्राष्टीय सम्मेलन में मृदा एवं जल प्रबंधन सत्र में बेस्ट पेपर अवॉर्ड' के लिए चुना गया।
  • उन्हें यह पुरस्कार उनके "भिंडी की पैदावार पर सिंचाई और पर्यावरण-अनुकूल पॉलीमर का प्रभाव" विषय पर शोध पत्र के ओरल प्रेजेंटेशन के लिए दिया गया।
  • यादव ने अपने प्रयोगों में पाया कि इको-फ्रेंडली पॉलीमर के इस्तेमाल से मृदा के भौतिक-रासायनिक गुणों पर बिना कोई असर डाले जल उपयोग दक्षता और भिंडी की पैदावार में बढ़ोतरी हुई।
  • इससे पानी की कमी वाले शुष्क एवं अर्ध-शुष्क इलाकों में गर्मी के मौसम में भिंडी की फसल में सिंचाई अंतराल भी बढ़ाया जा सकता है।
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थाईलैंड में डॉ. यादव को मिला 'बेस्ट पेपर अवॉर्ड'

उदयपुर । महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय अन्तर्गत मृदा विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. यादव को थाईलैंड के फुकेत शहर में 15-20 जून 2026 के दौरान "कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में नवोन्मेषी एवं वर्तमान प्रगति 2026" विषय पर आयोजित अंतर्राष्टीय सम्मेलन में मृदा एवं जल प्रबंधन सत्र में बेस्ट पेपर अवॉर्ड' के लिए चुना गया।

उन्हें यह पुरस्कार उनके "भिंडी की पैदावार पर सिंचाई और पर्यावरण-अनुकूल पॉलीमर का प्रभाव" विषय पर शोध पत्र के ओरल प्रेजेंटेशन के लिए दिया गया।

डॉ. यादव ने अपने प्रयोगों में पाया कि इको-फ्रेंडली पॉलीमर के इस्तेमाल से मृदा के भौतिक-रासायनिक गुणों पर बिना कोई असर डाले जल उपयोग दक्षता और भिंडी की पैदावार में बढ़ोतरी हुई।

इससे पानी की कमी वाले शुष्क एवं अर्ध-शुष्क इलाकों में गर्मी के मौसम में भिंडी की फसल में सिंचाई अंतराल भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा डॉ. यादव को मृदा विज्ञान विषय में उनके अकादमिक योगदान के लिए इस सम्मेलन में 'एक्सीलेंस इन टीचिंग अवॉर्ड' भी मिला।