मुख्य सामग्री पर जाएँ
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 उदयपुर · 29°C
MLSU

परिणाम आधारित शिक्षा से ही बनेगा सक्षम भारत : प्रो. कैलाश डागा

मुख्य बिंदु
  • मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “डिजाइनिंग एंड इम्प्लीमेंटिंग आउटकम बेस्ड एजुकेशन : ए पाथवे टू ट्रांसफॉर्मिंग टीचिंग एंड लर्निंग” का शुभारंभ शुक्रवार को विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली गेस्ट हाउस स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ।
  • नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप आयोजित यह कार्यशाला उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।
  • कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.
  • कैलाश डागा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और केवल सैद्धांतिक ज्ञान अब पर्याप्त नहीं रह गया है।
WAf𝕏TGin✉🖨
परिणाम आधारित शिक्षा से ही बनेगा सक्षम भारत : प्रो. कैलाश डागा
1 / 2

उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “डिजाइनिंग एंड इम्प्लीमेंटिंग आउटकम बेस्ड एजुकेशन : ए पाथवे टू ट्रांसफॉर्मिंग टीचिंग एंड लर्निंग” का शुभारंभ शुक्रवार को विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली गेस्ट हाउस स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ। नई शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप आयोजित यह कार्यशाला उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, नवाचार आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और केवल सैद्धांतिक ज्ञान अब पर्याप्त नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना चाहिए जो ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से परिपूर्ण हों।

प्रो. डागा ने कहा कि Outcome Based Education (OBE) विद्यार्थियों की वास्तविक क्षमताओं को विकसित करने वाली प्रणाली है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि विद्यार्थी पाठ्यक्रम पूर्ण करने के बाद क्या सीख पाए, क्या समझ पाए और समाज तथा उद्योग जगत में किस प्रकार योगदान दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य भी शिक्षा को रोजगारपरक, अनुसंधान उन्मुख और कौशल आधारित बनाना है।

उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक व्याख्यान आधारित शिक्षण पद्धति से आगे बढ़ते हुए इंटरैक्टिव, नवाचारपूर्ण और विद्यार्थी सहभागिता आधारित शिक्षण मॉडल अपनाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरक होते हैं। यदि शिक्षण में परिणाम आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाए तो विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता, नेतृत्व कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास स्वतः होने लगता है।

प्रो. डागा ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय लगातार अकादमिक गुणवत्ता सुधार, अनुसंधान संवर्धन और संस्थागत उत्कृष्टता की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यशाला शिक्षकों को Outcome Based Education की अवधारणा को समझने और उसे व्यवहारिक रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आईक्यूएसी निदेशक एवं वाणिज्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शूरवीर सिंह भाणावत ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में पहली बार इस प्रकार की व्यापक एवं व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की जा रही है, जो शिक्षकों को वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षण एवं मूल्यांकन प्रणाली विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) कृष्णकांत दवे ने Outcome Based Education, Course Outcomes (COs), Program Outcomes (POs), Program Specific Outcomes (PSOs) तथा Bloom’s Taxonomy की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए परिणाम आधारित अधिगम अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, शिक्षक, IQAC सदस्य एवं गीतांजलि विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने भाग लिया। संचालन डॉ. नेहा पालीवाल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हरीश द्वारा प्रस्तुत किया गया।