माँ-पापा के बारे में क्या लिखूँ मैं,
माँ-पापा ने ही तो मुझे लिखा है।
मेरी हर साँस, हर एक सपना,
उनकी दुआओं से ही तो सजा है।
माँ ने आँचल में दुनिया छुपाई,
पापा ने हौसलों की राह दिखाई।
जब गिरा तो माँ ने सहलाया,
जब डरा तो पापा ने उठाया।
भूखे पेट भी खुद मुस्कुराए,
मेरी हर ज़रूरत पहले निभाए।
मेरी खामोशी भी समझ ली उन्होंने,
मेरे हर दर्द को अपना मान लिया उन्होंने।
मैं जो आज इस मुकाम तक आया,
वो माँ-पापा के त्याग ने ही बनाया।
मेरी पहचान: माँ और पापा
विकास कुमार उज्जैनियां छात्र, मुंबई (महाराष्ट्र)
मुख्य बिंदु
- माँ-पापा के बारे में क्या लिखूँ मैं, माँ-पापा ने ही तो मुझे लिखा है।
- मेरी हर साँस, हर एक सपना, उनकी दुआओं से ही तो सजा है।
- माँ ने आँचल में दुनिया छुपाई, पापा ने हौसलों की राह दिखाई।
- जब गिरा तो माँ ने सहलाया, जब डरा तो पापा ने उठाया।
- भूखे पेट भी खुद मुस्कुराए, मेरी हर ज़रूरत पहले निभाए।
- मेरी खामोशी भी समझ ली उन्होंने, मेरे हर दर्द को अपना मान लिया उन्होंने।