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Literature News

शिक्षाविद् परिचय:डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव

नवाचारपरक एवं जनोन्मुख पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में बनाई अन्तर्राष्ट्रीय पहचान

मुख्य बिंदु
  • प्रभात कुमार सिंघल,लेखक एवं पत्रकार, कोटाप्रबुद्ध शिक्षाविद्, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विशेषज्ञ तथा नवाचारपरक जनपुस्तकालय सेवाओं के लिए देश-विदेश में पहचान बनाने वाले डॉ.
  • दीपक कुमार श्रीवास्तव का जन्म 26 नवंबर, 1974 को पिता डॉ.
  • कौशल कुमार श्रीवास्तव एवं माता श्रीमती चंद्र प्रभा श्रीवास्तव के परिवार में बारां जिले के अंता कस्बे में हुआ।
  • आपने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पीएच.
  • सूचना प्रौद्योगिकी, पीजीडीसी, बी.
  • लोक प्रशासन तक शिक्षा प्राप्त की तथा यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया है।
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शिक्षाविद् परिचय:डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव


डॉ. प्रभात कुमार सिंघल,लेखक एवं पत्रकार, कोटा


प्रबुद्ध शिक्षाविद्, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विशेषज्ञ तथा नवाचारपरक जनपुस्तकालय सेवाओं के लिए देश-विदेश में पहचान बनाने वाले डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव का जन्म 26 नवंबर, 1974 को पिता डॉ. कौशल कुमार श्रीवास्तव एवं माता श्रीमती चंद्र प्रभा श्रीवास्तव के परिवार में बारां जिले के अंता कस्बे में हुआ।

आपने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पीएच.डी., एम.फिल., एम.लिब. एंड आई.एससी. तथा बी.लिब. एंड आई.एससी., एम.टेक. एवं एम.एससी. सूचना प्रौद्योगिकी, पीजीडीसी, बी.एससी. बायो तथा एम.ए. लोक प्रशासन तक शिक्षा प्राप्त की तथा यूजीसी नेट उत्तीर्ण किया है।

आपका हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं पर समान अधिकार है। इनकी 16 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और 28 से अधिक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है।

आपने 140 से अधिक शोध-पत्रों के माध्यम से पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

आप इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) एवं वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा में काउंसलर एवं अकादमिक सेवाओं से जुड़े रहे हैं तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकालय संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े हैं।

आप इनेली इंडिया इनोवेटर एवं इनेली साउथ एशिया मेंटर रहे हैं तथा भारत के प्रथम एम.टेक. (आईटी) डिग्रीधारी पब्लिक लाइब्रेरियन के रूप में भी उल्लेखित हैं।

आपका नाम विश्व के सबसे बड़े पुस्तकालय संगठन इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ लाइब्रेरी एसोसिएशंस एंड इंस्टीट्यूशंस (इफ्ला) की वॉल ऑफ फेम में दर्ज है। वर्ष 2025 में आपका चयन इफ्ला गवर्नमेंट लाइब्रेरीज सेक्शन की स्टैंडिंग कमेटी (2025–2029) के लिए हुआ।

वर्तमान में आप इफ्ला गवर्नमेंट लाइब्रेरीज सेक्शन में इन्फॉर्मेशन कोऑर्डिनेटर (2025–2027) के रूप में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

डॉ. श्रीवास्तव ने पिछले वर्षों में राजस्थान के सार्वजनिक पुस्तकालयों में डिजिटलीकरण, स्वचालन, समावेशी पुस्तकालय सेवाओं, सामुदायिक सहभागिता तथा नवाचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय कार्य किया है।

इनके नेतृत्व में ई-ग्रंथालय 4.0, वेब-ओपेक, लगभग 75,000 पुस्तकों के कैटलॉगिंग कार्य तथा शोध एवं संदर्भ सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है।

दृष्टिबाधित पाठकों के लिए तकनीक आधारित सेवाओं, दिव्यांगजनों के लिए घर तक पुस्तक पहुँचाने की सुविधा, ट्रांसजेंडर समुदाय एवं घुमंतू समुदाय के लिए विशेष पुस्तकालय सेवाओं तथा सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित व्यक्तियों के लिए पुस्तकालय सेवाओं जैसी समावेशी पहल को भी विकसित किया है।

पिछले चार वर्षों में उनके व्यावसायिक एवं शैक्षणिक योगदान का विस्तार राष्ट्रीय से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक हुआ है।

वे फेडरल यूनिवर्सिटी डुसिन-मा, नाइजीरिया में सब बाटिकल प्रोफेसर तथा कोटा स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में अकादमिक योगदान दे रहे हैं।

ये अनेक अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं एवं शोध पत्रिकाओं के शोध-पत्र मूल्यांकन विशेषज्ञ भी हैं।

आपको 2023 से 26 के मध्य अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

इनमें एस.डी.एफ. बेस्ट पब्लिक लाइब्रेरियन अवार्ड-2023, ए.एल.ए. आई.एन.एल.पी. सर्टिफिकेशन, इफ्ला वॉल ऑफ फेम रिकॉग्निशन, टॉप टेन नेक्स्ट जनरेशन पब्लिक लाइब्रेरियन इंडिया, टॉप सिक्स इम्पैक्ट स्पेशलिस्ट लाइब्रेरियन, टॉप 75 लाइब्रेरी प्रोफेशनल्स इंडिया, एएसएलआईपी बेस्ट प्रोग्रेसिव लाइब्रेरियन अवार्ड-2024, एस4बी इंटरनेशनल अवार्ड-2024 तथा आईकोएल बेस्ट पब्लिक लाइब्रेरियन अवार्ड-2025 सहित विभिन्न सम्मान उल्लेखनीय हैं।

वर्ष 2026 में उन्हें इंडो-अफ्रीकन एकेडमिक मेंटर अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया, जो मरियम अबाचा अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ नाइजीरिया (एमएएयूएन) द्वारा प्रदान किया गया।

यह सम्मान उनके अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक, शोध एवं मार्गदर्शन योगदान की महत्वपूर्ण पहचान है।

उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, कार्यशालाओं, वेबिनार एवं संगोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता की है तथा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है। सार्वजनिक पुस्तकालयों में नवाचार, तकनीकी समावेशन और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों ने उन्हें “नवाचारपरक एवं जनोन्मुख पुस्तकालयाध्यक्ष” के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई है।

आपने विशेष रूप से पिछले चार वर्षों में पुस्तकालय को केवल पुस्तकों के संग्रह के स्थान के बजाय समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए ज्ञान, सूचना, डिजिटल सशक्तीकरण एवं सामाजिक समावेशन के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया है।

उनके प्रयासों से राजस्थान, विशेषकर हाड़ौती अंचल की सार्वजनिक पुस्तकालय गतिविधियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

उनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ, शोध, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता, सार्वजनिक पुस्तकालय सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता एवं प्राप्त प्रतिष्ठित सम्मान हाड़ौती और राजस्थान के लिए गौरव का विषय हैं।

वर्तमान में आप राजकीय संभागीय सार्वजनिक पुस्तकालय, कोटा के संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्रमुख तथा कोटा क्षेत्र के सार्वजनिक पुस्तकालयों के नोडल अधिकारी के रूप में सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं और लेखन में सक्रिय है।

संपर्क : संभागीय पुस्तकालयाध्यक्ष एवं प्रमुख राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा मो. 96947 83261